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रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

पृष्ठ 58, कुल 368 में से

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पृष्ठ 58

ग्यारह छंदो मे राधा के सौन्दर्य का वर्णन किया है। राधा रूप राशि है, उसके सौन्दर्य के कारण बरसाने मे सदैव आनंद की लहरियाँ तरंगित होती रहती है। घर-घर मे अपार कौतुक ओर रग का विस्तार रहता है। राधा-सौन्दर्य का वर्णन करने के लिए कवि ने प्राय उपमा, उत्प्रेक्षा और सदेह अलकारो का प्रयोग किया है। यह प्रयोग परम्परागत है। राधा के सौन्दर्य का वर्णन करती हुई एक गोपी राधा से कहती है कि तुम्हारा मुख इतना सुन्दर है जैसे अमृत-सार को सजोकर स्वयं चन्द्रमा उपस्थित हो गया हो। तुम्हारे शरीर का गठन ऐसा है जैसे सोने मे मणि-मुक्ताओ को जडने के लिए कुशल जडिया यौवन ने सुन्दर घर (रत्न जडने का गहरा चिन्ह) बना लिया हो। तुम्हारे अधरो की लाली काम-कामना जैसी सुशोभित है। तुम्हारी नासिका का छिद्र उस भौंरे के समान है जिसमे ज्ञान की नौका का गर्व नष्ट हो जाता है। कहने का भाव यह है कि राधा के सौन्दर्य का वर्णन नही किया जा सकता। नक्षत्रो की अनुपम प्रभा राधा-सौन्दर्य का कुछ-कुछ बोध करा सकती है। २३. मानवती राधा—प्रेम की परिपुष्टता के लिए आचार्यो ने मान को आवश्यक साधन माना है। जिस प्रकार रंग मे पुट लगाने से रंग का रग गहरा और पक्का हो जाता है, उसी प्रकार प्रेम मे मान करने से प्रेम मे दृढता आती है। रसखान ने भी उसका पालन किया है। मानवती का मान भग करने का उत्तरादायित्व उसकी सखियो पर होता है। वे अनेक प्रकार के साधनो का अवलम्बन लेकर अपने कार्य मे प्रवृत्त होती है। मानवती राधा को उसकी एक सखी समझाती हुई कहती है कि हे राधा ! जिस कृष्ण पर चारो ओर के राजाओ की स्त्रियाँ अपने प्राणो को न्यौछावर करती हुई नही थकती और भूमडल की सभी स्त्रियाँ जिसे प्राप्त करने के लिए सदैव आकुल रहती है, उसके प्रति तुम्हारा मान धारण करना उचित नही है। इसी प्रकार एक अन्य सखी राधा से कहती है कि यदि आनंद-सागर कृष्ण तेरे मान के कारण डर जाये तो तुझे अपना मान छोड देना चाहिए। यदि तुम मान नही छोड सकती तो कृष्ण से प्रेम करना छोड दो और यदि तुम प्रेम करना नही छोड सकती तो मान छोड़ दो। कृष्ण तुम्हारे मान से बहुत दु खी है और बेचारे हाथ मल रहे हैं। इसी प्रकार के अन्य वाक्य कहकर गोपियाँ राधा से मान छोडने के लिए आग्रह करती है। यह रीति परम्परागत है।