रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४२ रसखान-ग्रन्थावली अभाव के कारण यमुना के तल मे बैठ गई । उस आग के कारण जब यमुना का पानी खौलने लगा तो उसकी गर्मी से पाताल-लोक मे स्थित शेषनाग भी जलने लगा । पर ऐसे वर्णन परम्परागत ही समझने चाहिए । २७. सपत्नी भाव—इस प्रसग की अवतारणा नारियो के मन की स्वाभा- विकता को चित्रित करने के लिए की गई है । नारी यह सहन नही कर सकती कि उसके प्रिय को,अन्य कोई नारी भी प्रेम करे । यदि ऐसा होता है तो उसके मन मे जलन होती है । इसी जलन को सपत्नी-भाव कहते है । कृष्ण-काव्य मे कुब्जा को लेकर ही इस भाव की अभिव्यक्ति की गई है । रसखान ने भी इस परम्परा का अनुसरण किया है । इनकी गोपियाँ उद्धव से कहती है कि हे उद्धव ! उस आनन्द सागर कृष्ण के गुणो को सुनकर हमारा हृदय सौ-सौ टुकड़े होकर फट गया है । हम नही जानती कि कौनसा मंत्र पढकर कुब्जा ने कृष्ण पर चला दिया है । हम अपने मन मे विचार कर यह बात सत्य कहती है और जानती है कि कृष्ण ने इस प्रकार से कितना यश प्राप्त किया है ? अर्थात् वे बहुत बदनाम हो गये है, क्योकि ब्रज के सब नर-नारी यह कहते है कि कृष्ण कुब्जा के दाम बन गए है । कही-कही यह सपत्नी-भाव आक्रोश के रूप मे फूट पडा है । एक गोपी कहती है कि वह कुब्जा यहाँ पर होती तो उसे लात घूँसे मारती और उसका शरीर चोट लेती । अपने हृदय का सारा गुस्सा निकाल लेती और उमकी नाक को छेदकर उसमे कौडी पहना देती । उस रांड को मै ऐसा नाच नचाती कि उसे कृष्ण को रिझाने का फल मिल जाता । २८ कुवलयापीड-वध—सभी कृष्ण भक्त-कवियो ने कृष्ण के अलौकिकत्व का प्रतिपादन करने के लिए इस कथा का वर्णन किया है । रसखान ने इस परम्परा का निर्वाह केवल एक छंद से ही कर दिया है । २६ उद्धव उपदेश—इस शीर्षक के अन्तर्गत रसखान के चार सवैये उपलब्ध है । कथा परम्पागत है । उद्धव गोपियो को निर्गुण ब्रह्म का उपदेश देने के लिए आते है और गोपियाँ उनकी परिहासपूर्ण भर्त्सना करती है । ३० ब्रज-प्रेम—इस विषय के दो छंद रसखान के मिले है । कृष्ण को द्वारिका मे रहकर ब्रज की याद आती है और वे अपनी वेदना की अभिव्यक्ति अपनी रानी रुक्मणी से करते है ।