रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ
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समीक्षा भाग ६७ ६. 'हरि के सब आधीन पै, हरी प्रेम आधीन । याही तें हरि आपु ही, याहि बड़प्पन दीन ॥' —रसखान 'अह भक्तपराधीनो ह्य स्वतन्त्र इव द्विज । साधुभिर्ग्र स्त हृदयो भत्तैर्भक्तजनप्रियः ॥' —भागवत अन्त मे, रसखान का प्रेम दर्शन भारतीय दर्शन पर आधृत है । भारतीय दर्शन मे प्रेम को जिस रूप मे वर्णित किया है, शुद्ध प्रेम का जो वैविध्य दिखाया है, वही रूप रसखान ने प्रेम-वाटिका मे प्रतिपादित किया है ।