भारतकोश
रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

पृष्ठ 91, कुल 368 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 91

७४ रसखान-ग्रन्थावली कदंब विटप के निकट तटनी के तट, अटा चढ़ि चाहि पीत-पट फहरानि री । रस वरसावै तन तपनि बुझावै नैन, आननि रिझावै वह आवै रसखानि री । ३ 'नैननि बक बिसाल के वाननि झेलि सकै अस कौन नवेली । लोलत है हिय तीछन कोर मुमार गिरी तिय कोटिक हेली । छोडै नहीं छिनहूं रसखानि सु लागी फिरै द्रुम मों जनु वेली । रौरि परि छवि की ब्रजमडल कुंडल गंड'न कुंतल केली ॥' ४ 'बांकी बडी अँखियाँ वडरारे कपोल'न बोलनि की कल वानी । सुन्दर हास सुधानिधि सो मुख मूरति रंग सुधारस-सानी । ऐसी नवेली ने देखे कहूँ ब्रजराज लला अति ही सुखदानी । डोलति है बन वीथिन में रसखानि मनोहर रूप लुभानी ॥' ५. 'लाल लसै पगिया सब के पट कोटि सुगंधनि भीने । अंगनि अंग सजे सब ही रसखानि अनेक जराउ नवीने । मुकता गल माल लसै सबके सब ग्वार कुमार सिंगार सो कीने । पै सिगरे ब्रज वेहरि ही हरि ही के हरै हियरा हरि लीने ॥' ६ 'साँझ समै जिहि देखती ही तिहि पेखन का कौ मन यों 'ललकै री । ऊँची अटान चढ़ी ब्रजबाल सु लाज मनेह दुरै उझकै री । गोधन धूरि की धूँधरी मैं तिनकी छवि यों रसखानि तकै री । पावक के गिरि ते बुझि मानो धुँवा-लपटी लपटै लपकै री ॥' जिस प्रकार रसखान ने कृष्ण के रूप का, सौन्दर्य का वर्णन किया है, उसी प्रकार राधा के सौन्दर्य का भी विस्तार से वर्णन किया है । कुछ उदाहरण प्रस्तुत है— १. 'प्यारी की चाह सिंगार तरंगनि जाय लगी रति की दुति कूलनि । जोबन जेब कहा कहिये उर पै छवि मजु अनेक दुकूलनि ।