रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)

रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)
Ratnavali Natika of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished520 पृष्ठ
पृष्ठ 174, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 174
। ( परिक्रम्यावलोक्य च ) एसो क्खु पिअवअस्सोWait, footnote mark 5 is afterणिवेदेमि: णिवेदेमि⁵ ।`
Line 9:
तस्स दोहअस्स लद्धपच्चअदाए परोक्खं बि तं णोमालिअं पच्चक्खं
Wait, is it लद्धपच्चअदाए?
Let's check Chhaya (L23): लब्धप्रत्ययतया.
In Prakrit: लद्धपच्चअदाए!
परोक्खं बि (or परोक्खं वि? Chhaya: परोक्षामपि -> परोक्खं बि or वि).
तं णोमालिअं -> तं णोमालिअं.
पच्चक्खं -> पच्चक्खं.
Line 10:
बिअ कुसुमिदं पेक्खंतो हरिसुप्फुल्ललोअणो इदो ज्जेब्ब आअ-
Wait, is it पेक्खंतो or पेक्खन्तो? पेक्खंतो (anusvara).
हरिसुप्फुल्ललोअणो - wait, look at फु: हरिसुप्फुल्ललोअणो (Sanskrit: हर्ष