भारतकोश
रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)

रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)

Ratnavali Natika of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 268, कुल 520 में से

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पृष्ठ 268

), in 'लक्ष्मण' (no), look at 'दूतिकाव्यापारं'? Wait, let's read the characters: द (da) ा (aa) ति (ti) व्या (vya) पा (pa) रं (ram) Yes, it literally looks like दातिव्यापारं or दूतीव्यापारं! Let's look at the Sanskrit commentary: "तथा त्वमपि तमतिक्रम्य राजान्तःपुरं नायिकामिलनविषये दातिव्यापारं नैपुण्येन विचारयसि।" Wait, what about the word before it? "नायिकामिलनविषये" - look at the end of the word: य with 'े'? Yes, 'विषये'! Wait, look at the image again: "नायिकामिलनविषये दातिव्यापारं" Let's look at line 3: "प्रसादीकृतम् प्रसादप्रकारेण" or "प्रसादरूपेण"? Look at: प्र सा द रू पे ण -> yes, "प्रसादरूपेण"! Wait, after that: "अनुग्रहरूपेण प्रदत्तम् ।" Wait, look at "प्रदत्तम्": प्र द त्त म् -> "प्रदत्तम् ।" Then: "नेपथ्यम् वेषः । अहमपि सुसङ्गतापि । परिजनवत्सलां" Line 5: "पर