ऋभु गीता (शिव रहस्य - निदिध्यासन व अद्वैत बोध)

ऋभु गीता (शिव रहस्य - निदिध्यासन व अद्वैत बोध)
Ribhu Gita of Shiva Rahasya Hindi
महर्षि ऋभु / महर्षि निदाघ द्वारा
स्रोत: Ribhu Gita Sanskrit Shlokas with Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished249 पृष्ठ
पृष्ठ 202, कुल 249 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 202
एवं त्वं त्वनिशं भजस्व नित्यं शान्तोद्यखिलवाक् समूहभावना ॥ 45.27॥
सत्यत्वाभावभावितोऽनुरूपशीलः । संपश्यन् जगदिदमासमंजसं सदा हि ॥ 45.28॥
॥ इति श्रीशिवरहस्ये शंकराख्ये षष्ठांशे ऋभुनिदाघसंवादे निदाघकृतगुरुस्तुतिवर्णनं नाम पंचचत्वारिंशोऽध्यायः ॥