ऋभु गीता (शिव रहस्य - निदिध्यासन व अद्वैत बोध)
Ribhu Gita of Shiva Rahasya Hindi
महर्षि ऋभु / महर्षि निदाघ द्वारा
स्रोत: Ribhu Gita Sanskrit Shlokas with Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंचिदेव देवताकारं चिदेव शिवपूजनम् ।
चिदेव त्वं चिदेवाहं सर्वं चिन्मात्रमेव हि ॥ १६.४४॥
चिदेव परमाकारं चिदेव हि निरामयम् ।
चिन्मात्रमेव सततं चिन्मात्रं हि परायणम् ॥ १६.४५॥
चिन्मात्रमेव वैराग्यं चिन्मात्रं निर्गुणं सदा ।
चिन्मात्रमेव संचारं चिन्मात्रं मन्त्रतन्त्रकम् ॥ १६.४६॥
चिदाकारमिदं विश्वं चिदाकारं जगत्त्रयम् ।
चिदाकारमहंकारं चिदाकारं परात् परम् ॥ १६.४७॥
चिदाकारमिदं भेदं चिदाकारं तृणादिकम् ।
चिदाकारं चिदाकाशं चिदाकारमरूपकम् ॥ १६.४८॥
चिदाकारं महानन्दं चिदाकारं सुखात् सुखम् ।
चिदाकारं सुखं भोज्यं चिदाकारं परं गुरुम् ॥ १६.४९॥
चिदाकारमिदं विश्वं चिदाकारमिदं पुमान् ।
चिदाकारमजं शान्तं चिदाकारमनामयम् ॥ १६.५०॥
चिदाकारं परातीतं चिदाकारं चिदेव हि ।
चिदाकारं चिदाकाशं चिदाकाशं शिवायते ॥ १६.५१॥
चिदाकारं सदा चित्तं चिदाकारं सदाऽमृतम् ।
चिदाकारं चिदाकाशं तदा सर्वान्तरान्तरम् ॥ १६.५२॥
चिदाकारमिदं पूर्णं चिदाकारमिदं प्रियम् ।
चिदाकारमिदं सर्वं चिदाकारमहं सदा ॥ १६.५३॥
चिदाकारमिदं स्थानं चिदाकारं हृदम्बरम् ।
चिदाबोधं चिदाकारं चिदाकाशं ततं सदा ॥ १६.५४॥
चिदाकारं सदा पूर्णं चिदाकारं महत्फलम् ।
चिदाकारं परं तत्त्वं चिदाकारं परं भवान् ॥ १६.५५॥
चिदाकारं सदामोदं चिदाकारं सदा मृतम् ।
चिदाकारं परं ब्रह्म चिदहं चिदहं सदा ॥ १६.५६॥
चिदहं चिदहं चित्तं चित्तं स्पृस्य न संशयः ।
चिदेव जगदाकारं चिदेव शिवशंकरः ॥ १६.५७॥
चिदेव गगनाकारं चिदेव गणनायकम् ।
चिदेव भुवनाकारं चिदेव भवभावनम् ॥ १६.५८॥