ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1194, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयदङ्ग तविषीयवो यामं शुभ्रा अचिध्वम्. नि पर्वता अहासत.. (२) हे शक्ति के इच्छुक एवं शोभन मरुतो! जब तुम रथ में घोड़े जोड़ते हो, तब तुम्हारे भय से पर्वत भी कांप जाते हैं. (२) उदीरयन्त वायुभिर्वाश्रासः पृश्निमातरः. धुक्षन्त पिप्युषीमिषम्.. (३) शब्द करने वाले एवं पृश्नि के पुत्र मरुद्गण हवाओं द्वारा बादलों को ऊपर उठाते हैं एवं बुद्धि बढ़ाने वाला अन्न दान करते हैं. (३) वपन्ति मरुतो मिहं प्र वेपयन्ति पर्वतान्. यद्यामं यान्ति वायुभिः.. (४) मरुद्गण जब हवाओं के साथ चलते हैं, तब वर्षा को बिखेरते हैं एवं पहाड़ों को कंपित करते हैं. (४) नि यद्यामाय वो गिरिर्नि सिन्धवो विधर्मणे. महे शुष्माय येमिरे. (५) हे मरुतो! तुम्हारे रथ के गमन के लिए पर्वतों का मार्ग नियत है. नदियां रक्षा एवं महान् बल पाने के लिए निश्चित मार्ग वाली हैं. (५) युष्माँ उ नक्तमूतये युष्मान्दिवा हवामहे. युष्मान्प्रयत्यध्वरे.. (६) हे मरुतो! हम तुम्हें अपनी रक्षा के लिए रात में, दिन में एवं यज्ञ के आरंभ में बुलाते हैं. (६) उदु त्ये अरुणप्सवश्चित्रा यामेभिरीरते. वाश्रा अधि ष्णुना दिवः.. (७) वे ही लाल रंग वाले, विचित्र एवं शब्द करने वाले मरुद्गण अपने रथ द्वारा द्युलोक के ऊंचे भाग से आते हैं. (७) सृजन्ति रश्मिमोजसा पन्थां सूर्याय यातवे. ते भानुभिर्वि तस्थिरे.. (८) जो मरुद्गण सूर्य के चलने के लिए किरणरूपी मार्ग बनाते हैं, वे अपने तेजों द्वारा स्थित रहते हैं. (८) इमां मे मरुतो गिरमिमं स्तोममृभुक्षणः. इमं मे वनता हवम्.. (९) हे मरुतो! मेरे इस स्तुतिवचन को मानो. हे महान् मरुतो! मेरे इस स्तोत्र को स्वीकार करो एवं मेरी इस पुकार को पूरा करो. (९) त्रीणि सरांसि पृश्नयो दुदुहे वज्रिणे मधु. उत्सं कवन्धमुद्रिणम्..(१०) वज्रधारी इंद्र के लिए पृश्नियों ने सोमरस को झरनों, जल और मेघ से दुहा था. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*