ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1275, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंपिओ. (१) प्राव स्तोतारं मघवन्नव त्वां पिबा सोमं मदाय कं शतक्रतो. यं ते भागमधारयन् विश्वाः सेहानः पृतना उरु ज्रयः समप्सुजिन्मरुत्वाँ इन्द्र सत्पते.. (२) हे इंद्र! तुम स्तोता की रक्षा करो तथा सोमरस पीकर अपनी रक्षा करो. हे सज्जनपालक एवं बहुकर्म वाले इंद्र! देवों ने तुम्हारे लिए सोमरस का जो भाग निश्चित किया है, उसे समस्त शत्रुसेनाओं एवं वेगों को पराजित करके तथा जल के बीच में विजयी बनकर पिओ. (२) ऊर्जा देवाँ अवस्योजसा त्वां पिबा सोमं मदाय कं शतक्रतो. यं ते भागमधारयन् विश्वाः सेहानः पृतना उरु ज्रयः समप्सुजिन्मरुत्वाँ इन्द्र सत्पते.. (३) हे इंद्र! तुम हव्य अन्न द्वारा देवों की तथा बल द्वारा अपनी रक्षा करते हो. हे सज्जनपालक तथा बहुकर्म वाले इंद्र! देवों द्वारा सोमरस के अपने निश्चित भागों को तुम समस्त शत्रुओं एवं वेगों को पराजित करके तथा जल के बीच विजयी बनकर पिओ. (३) जनिता दिवो जनिता पृथिव्याः पिबा सोमं मदाय कं शतक्रतो. यं ते भागमधारयन् विश्वाः सेहानः पृतना उरु ज्रयः समप्सुजिन्मरुत्वाँ इन्द्र सत्पते.. (४) हे इंद्र! तुम द्युलोक एवं धरती के जनक हो. हे सज्जनपालक तथा बहुकर्म वाले इंद्र! देवों द्वारा सोमरस के अपने निश्चित भाग को तुम समस्त शत्रुओं एवं वेगों को पराजित करके तथा जल के बीच विजयी बनकर पिओ. (४) जनिताश्वानां जनिता गवामसि पिबा सोमं मदाय कं शतक्रतो. यं ते भागमधारयन् विश्वाः सेहानः पृतना उरु ज्रयः समप्सुजिन्मरुत्वाँ इन्द्र सत्पते.. (५) हे इंद्र! तुम घोड़ों तथा गायों के जनक हो. हे सज्जनपालक तथा बहुकर्म वाले इंद्र! देवों द्वारा सोमरस के अपने निश्चित भाग को तुम समस्त शत्रुओं एवं वेगों को पराजित करके तथा जल के बीच विजयी बनकर पिओ. (५) अत्रीणां स्तोममद्रिवो महस्कृधि पिबा सोमं मदाय कं शतक्रतो. यं ते भागमधारयन् विश्वाः सेहानः पृतना उरु ज्रयः समप्सुजिन्मरुत्वाँ इन्द्र सत्पते.. (६) हे पर्वतों के स्वामी इंद्र! अत्रिगोत्रीय ऋषियों के स्तोत्र का आदर करो. हे सज्जनपालक एवं बहुकर्म वाले इंद्र! देवों द्वारा सोमरस के अपने निश्चित भाग को तुम समस्त शत्रुओं एवं ebook converter DEMO Watermarks*