भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1280, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1280

सात मनुष्यों वाले, सभी नदियों में आश्रित एवं तीन स्थानों वाले अग्नि ने मांधाता के लिए शत्रुओं का अधिक हनन किया था. यज्ञों में प्रमुख अग्नि सभी शत्रुओं को मारें. (८) अग्निखीणि त्रिधातून्या क्षेति विदथा कविः. स त्रीँरैकादशाँ इह यक्षच्च पिप्रयच्च नो विप्रो दूतः परिष्कृतो नभन्तामन्यके समे.. (९) क्रांतदर्शी एवं धरती आदि तीन स्थानों में रहने वाले अग्नि देवों के दूत, प्राज्ञ एवं अलंकृत होकर इस यज्ञ में तैंतीस देवों का यजन करें एवं हमारी अभिलाषा पूरी करें. अग्नि सभी शत्रुओं को मारें. (९) त्वं नो अग्न आयुषु त्वं देवेषु पूर्व्यं वस्व एक इरज्यसि. त्वामापः परिस्रुतः परि यन्ति स्वसेतवो नभन्तामन्यके समे.. (१०) हे अग्नि! तुम अकेले होते हुए भी मानो देवों के स्वामी हो. हे सेतुरूप अग्नि! तुम्हारे चारों तरफ जल रहता है. तुम सभी शत्रुओं को मारो. (१०) सूक्त—४० देवता—इंद्र व अग्नि इन्द्राग्नी युवं सु नः सहन्ता दासथो रयिम्. येन दृळहा समत्स्वा वीळु चित्साहिषीमह्यग्निर्वनेव वात इन्नभन्तामन्यके समे.. (१) हे इंद्र व अग्नि! तुम शत्रुओं को हराते हुए हमें धन दो. अग्नि वायु की सहायता से जिस प्रकार वन को जलाते हैं, उसी प्रकार लोग अग्नि द्वारा दिए धन की सहायता से शत्रुओं को हराते हैं. अग्नि सभी शत्रुओं को मारें. (१) नहि वां वव्रयामहेऽथेन्द्रमिद्याजामहे शविष्ठं नृणां नरम्. स नः कदा चिदर्वता गमदा वाजसातये गमदा मेधसातये नभन्तामन्यके समे.. (२) हे इंद्र व अग्नि! हम तुमसे धन की याचना नहीं करते. हम तो सबके नेता एवं सबसे अधिक शक्तिशाली इंद्र का यज्ञ करते हैं. इंद्र कभी अन्न देने के लिए और कभी यज्ञ प्राप्त करने के लिए घोड़े पर चढ़कर आते हैं. इंद्र एवं अग्नि सभी शत्रुओं को मारें. (२) ता हि मध्यं भराणामिन्द्राग्नी अधिक्षितः. ता उ कवित्वना कवी. पृच्छ्यमाना सखीयते सं धीतमश्रुतं नरा नभन्तामन्यके समे.. (३) प्रसिद्ध इंद्र एवं अग्नि संग्रामों के बीच में निवास करते हैं. हे क्रांतदर्शी नेताओ! कविजनों द्वारा पूछने पर तुम्हीं मित्रता के इच्छुक यजमान द्वारा किए हुए यज्ञकर्म की व्याख्या करते हो. इंद्र एवं अग्नि सभी शत्रुओं का नाश करें. (३) अभ्यर्च नभाकवदिन्द्राग्नी यजसा गिरा. ebook converter DEMO Watermarks*