भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1557, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1557

ऊर्ध्वं भानुं सूर्यस्य स्तभायन्दिवो वसुभिररतिर्वि भाति.. (२) अग्नि विश्व के पालक सूर्य से उत्पन्न उषा को उत्पन्न करते हुए अपनी ज्वालाओं से काली रात को पराजित करते हैं. गमनशील अग्नि स्वर्ग में फैलने वाली अपनी किरणों द्वारा सूर्य के प्रकाश को ऊपर रोकते हुए विशेषरूप से चमकते हैं. (२) भद्रो भद्रया सचमान आगात्स्वसारं जारो अभ्येति पश्चात्. सुप्रकेतैर्द्युभिरग्निर्विष्ठन्नुशद्भिर्वर्णैरभि राममस्थात्.. (३) दीप्त उषा द्वारा सेवित कल्याणकारी अग्नि आए. इसके शत्रुओं को नष्ट करने वाले अग्नि, अपनी बहिन उषा के पास जाते हैं. अपने शोभन ज्ञानों और दीप्त तेजों के साथ स्थित अग्नि अपने निवारक श्वेत वर्ण के तेजों द्वारा काले अंधकार को मिटाते हैं. (३) अस्य यामासो बृहतो न वग्नूनिन्धाना अग्नेः सख्युः शिवस्य. ईड्यस्य वृष्णो बृहतः स्वासो भामासो यामन्नक्तवश्विकित्रे.. (४) महान् अग्नि की दीप्तियुक्त किरणें स्तुतिकर्त्ताओं को बाधा नहीं पहुंचातीं सखा, कल्याणकर्त्ता, स्तुतिमय, अभिलाषापूरक, महान् एवं शोभन मुख वाले अग्नि की किरणें तीक्ष्ण होकर तप्त करने के लिए देवों के पास जाती हैं एवं प्रसिद्ध होती हैं. (४) स्वना न यस्य भामासः पवन्ते रोचमानस्य बृहतः सुदिवः. ज्येष्ठेभिर्यस्तेजिष्ठैः क्रीळुमद्भिर्वर्षिष्ठेभिर्भानुभिर्नक्षति द्याम्.. (५) तेजस्वी, महान् और शोभन दीप्ति वाले अग्नि की किरणें शब्द करती हुई जाती हैं. अग्नि अपने अत्यंत प्रशंसनीय, परम तेजस्वी, क्रीड़ा करने वाले एवं अधिक बड़े तेजों के द्वारा स्वर्ग को व्याप्त करते हैं. (५) अस्य शुष्मासो ददृशानपवेर्जेहमानस्य स्वनयन्नियुद्भिः. प्रत्नेभिर्यो रुशद्भिर्देवतमो वि रेभद्भिररतिर्भाति विश्वा.. (६) दीप्तिशाली शस्त्रों वाले और देव लोक में गमन की इच्छा वाले अग्नि की किरणें शोषक बनकर शब्दायमान हैं एवं देवों में प्रमुख गमनशील अग्नि श्वेतवर्ण होकर अपनी दीप्ति बिखेरते हैं. (६) स आ वक्षि महि न आ च सत्सि दिवस्पृथिव्योररतिर्युवत्योः. अग्निः सुतुकः सुतुकेभिरश्वै रभस्वद्भी रभस्वाँ एह गम्याः.. (७) हे अग्नि! हमारे यज्ञ में महान् देवों को लाओ. हे परस्पर मिले हुए द्यवा-पृथिवी में सूर्य के रथ से जाने वाले अग्नि! तुम हमारे यज्ञ में बैठो. हे स्तोताओं द्वारा सुखपूर्वक प्राप्त करने योग्य एवं वेगशाली अग्नि! तुम सरल गति वाले एवं तीव्रगामी अश्वों द्वारा हमारे यज्ञ में आओ. ebook converter DEMO Watermarks*