भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 1558

(७) सूक्त—४ देवता—अग्नि प्र ते यक्षि प्र त इयर्मि मन्म भुवो यथा वन्द्यो नो इवेषु. धन्वन्निव प्रपा असि त्वमग्न इयक्षवे पूरवे प्रत्न राजन्.. (१) हे अग्नि! मैं तुम्हारे लिए हवि देता हूं एवं सुंदर स्तुतियां बोलता हूं. हे सबके वंदनीय अग्नि! तुम हमारे आह्वानाें में आते हो. हे प्राचीन एवं सबके स्वामी अग्नि! जिस प्रकार मरुस्थल में छोटा जलाशय भी सुखद होता है, उसी प्रकार तुम यज्ञकर्त्ता मनुष्य को धन देकर सुखदाता बनते हो. (१) यं त्वा जनासो अभि सञ्चरन्ति गाव उष्णमिव व्रजं यविष्ठ. दूतो देवानामास मर्त्यानामन्तर्महाँश्चरसि रोचनेन.. (२) हे अतिशय युवा अग्नि! ठंड से परेशान गाएं जिस प्रकार गरम पशुशाला में जाती हैं, उसी प्रकार यजमान फल पाने के लिए तुम्हारी सेवा करते हैं. हे महान् अग्नि! तुम देवों और मानवों के दूत हो एवं द्यावा-पृथिवी के बीच से हवि लेकर अंतरिक्ष में घूमते हो. (२) शिशुं न त्वा जेन्यं वर्धयन्ती माता बिभर्ति सचनस्यमाना. धनोरधि प्रवता यासि हर्यञ्जिगीषसे पशुरिवावसृष्टः.. (३) हे जयशील अग्नि! पुत्र के समान तुम्हारा पोषण करती हुई एवं तुमसे संपर्क चाहती हुई धरती माता तुम्हें धारण करती हैं. हे अभिलाषी अग्नि! तुम अंतरिक्ष के प्रसिद्ध मार्ग से यज्ञ में आते हो. जिस प्रकार छोड़ा हुआ पशु पशुशाला में जाना चाहता है, उसी प्रकार तुम हवि लेकर देवों के पास जाना चाहते हो. (३) मूरा अमूर न वयं चिकित्वो महित्वमग्ने त्वमङ्ग वित्से. शये वव्रिश्चरति जिह्वयादन्नेरिह्यते युवतिं विश्पतिः सन्.. (४) हे मूढ़ता रहित एवं ज्ञानी अग्नि! हम मूर्ख होने के कारण तुम्हारी महिमा नहीं जानते हैं, किंतु तुम हमारा महत्त्व जानते हो. अग्नि ओषधियों में निवास करते हैं एवं ज्वालारूपी जीभ से हव्य खाते हुए चलते हैं. प्रजाओं के स्वामी अग्नि आहुतियों का स्वाद लेते हैं. (४) क्विचिज्जायते सनयासु नव्यो वने तस्थौ पलितो धूमकेतुः. अस्नातापो वृषभो न प्र वेति सचेतसो यं प्रणयन्त मर्ताः.. (५) नवीनतम अग्नि किसी स्थान में उत्पन्न होते हैं तथा प्राचीन वृक्षों में रहते हैं. श्वेतवर्ण वाले एवं धुएं से जाने गए अग्नि वन में रहते हैं. स्नान के बिना ही शुद्ध रहने वाले अग्नि बैल ebook converter DEMO Watermarks*