ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1559, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंके समान जल के पास जाते हैं. मनुष्य एकचित्त होकर अग्नि को प्रसन्न करते हैं. (५) तनूत्यजेव तस्करा वनर्गू रशनाभिर्दशभिरभ्यधीताम्. इयं ते अग्ने नव्यसी मनीषा युक्ष्वा रथं न शुचयद्भिरङ्गैः.. (६) हे अग्नि! जिस प्रकार वन में घूमने वाले एवं चोरी के काम में प्राण देने के लिए तैयार दो चोर यात्री को रस्सी से बांधकर खींचते हैं, उसी प्रकार हमारे दो हाथ दस उंगलियों की सहायता से तुम्हें मथते हैं. हे अग्नि! तुम्हारे लिए यह नई स्तुति है. जिस प्रकार रथ में घोड़े जोड़े जाते हैं, उसी प्रकार तुम अपने तेजों को इस यज्ञ में मिलाओ. (६) ब्रह्म च ते जातवेदो नमश्चेयं च गीः सदमिद्धर्धनी भूत्. रक्षाणो अग्ने तनयानि तोका रक्षोत नस्तन्वो३ अप्रयुच्छन्.. (७) हे बुद्धिमान् अग्नि! हमारे द्वारा तुम्हें दिया गया अन्न और की गई स्तुति सदा बढ़ती रहे. तुम हमारे पुत्र-पौत्रों की सदा रक्षा करो तथा सावधानी से हमारे अंगों को रखाओ. (७) सूक्त—५ देवता—अग्नि एकः समुद्रो धरुणो रयीणामस्मद्धृदो भूरिजन्मा वि चष्टे. सिषक्त्यूधर्निण्योरुपस्थ उत्सस्य मध्ये निहितं पदं वेः.. (१) धनों के उद्गम, धनों को धारण करने वाले, अनोखे एवं विविध जन्मों वाले अग्नि हमारे मन की अभिलाषाओं को जानते हैं तथा अंतरिक्ष के समीप वर्तमान रहकर रात्रि का सेवन करते हैं. हे अग्नि! मेघ में छिपे हुए स्थान पर जाओ. (१) समानं नीळं वृषणो वसानाः सं जग्मिरे महिषा अर्वतीभिः. ऋतस्य पदं कवयो नि पान्ति गुहा नामानि दधिरे पराणि.. (२) आहुतियां पूर्ण करने वाले यजमान एकमात्र अग्नि को मंत्रों से आच्छादित करके घोड़ियों को प्राप्त कर चुके हैं. बुद्धिमान् लोग जल के निवासस्थान अग्नि की रक्षा करते हैं एवं अंतरिक्ष में स्थित अग्नि के दिव्य नामों को हृदय में धारण करते हैं. (२) ऋतायिनी मायिनी सं दधाते मित्वा शिशुं जज्ञतुर्वर्धयन्ती. विश्वस्य नाभिं चरतो ध्रुवस्य कवेश्चित्तन्तुं मनसा वियन्तः.. (३) सत्य एवं यज्ञकर्म से युक्त द्यावा-पृथिवी अग्नि को धारण करते हैं एवं समय की सीमा में घिरे शिशुरूप अग्नि को माता-पिता के समान बढ़ाते हैं. मनुष्य सभी स्थावर और जंगम प्राणियों की नाभि के समान प्रधान तथा मेधावी वैश्वानर नामक अग्नि का मन में ध्यान करते हुए सुखी होते हैं. (३) ebook converter DEMO Watermarks*