ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1708, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्तोत्र सूर्या के रथ के पहियों के अरे थे. कुरीर नामक छंद उस रथ का भीतरी भाग था. अश्विनीकुमार सूर्या के वर एवं अग्नि उसके आगे चलने वाले थे. (८) सोमो वध्यूरभवदश्विनास्तामुभा वरा. सूर्या यत्पत्ये शंसन्तीं मनसा सविताददात्.. (९) सूर्या ने जब पति की कामना की और सविता ने मन से अपनी कन्या सोम को दी थी, उस समय सोम वधू की कामना करने वाले वर थे. अश्विनीकुमार ही सूर्या के वर बने. (९) मनो अस्या अन आसीद् द्यौरासीदुत च्छदि:. शुक्रावनड्वाहावास्तां यदयात्सूर्या गृहम्.. (१०) सूर्या जिस समय पति के घर गई उस समय उसका मन ही उसकी गाड़ी थी, आकाश परदा था तथा सूर्य एवं चंद्र बैल थे. (१०) ऋक्सामभ्यामभिहितौ गावौ ते सामनावित:. श्रोत्रं ते चक्रे आस्तां दिवि पन्थाश्चराचर:.. (११) ऋग्वेद और सामवेद द्वारा वर्णित सूर्य एवं चंद्रमारूपी दो बैल सूर्या की गाड़ी को खींच रहे थे. हे सूर्या! तुम्हारे कान ही गाड़ी के पहिए थे एवं आकाश उस रथ का मार्ग था. (११) शुची ते चक्रे यात्या व्यानो अक्ष आहत:. अनो मनस्मयं सूर्यारोहत्प्रयती पतिम्.. (१२) हे सूर्या पतिगृह के लिए चलते समय दोनों कान तुम्हारी गाड़ी के पहिए थे एवं वायु उन में अरों के समान थे. सूर्या इस प्रकार की मनरूपी गाड़ी पर सवार हुई. (१२) सूर्याया वहतु: प्रागात्सविता यमवासृजत्. अघासु हन्यन्ते गावोऽर्जुन्यो: पर्युह्यते.. (१३) गाय आदि के रूप में दिया गया दहेज सूर्या के आगे-आगे चला. वह दहेज सूर्य ने दिया था. मघा नक्षत्र में दी गई गाएं डंडे से हांकी जा रही थीं. पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्रों में सूर्या एवं उसका दहेज पतिगृह ले जाया गया. (१३) यदश्विना पृच्छमानावयातं त्रिचक्रेण वहतुं सूर्याया:. विश्वे देवा अनु तद्वामजानन्पुत्र: पितराववृणीत पूषा.. (१४) हे अश्विनीकुमारो! जिस समय तुम सूर्या के विवाह के विषय में पूछने के लिए तीन पहियों वाले रथ से गए थे, उस समय सभी देवों ने तुम्हारा समर्थन किया था और पूषा ने तुम्हें माता-पिता के रूप में स्वीकार किया था. (१४) यदयातं शुभस्पती वरेयं सूर्यामुप. क्वैकं चक्रं वामासीत्क्व देष्ट्राय तस्थथु:.. (१५) ebook converter DEMO Watermarks*