भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1788, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1788

बनकर दीप्तिधारक बनो. (७) स त्वमग्ने प्रतीकेन प्रत्योष यातुधान्यः. उरुक्षयेषु दीद्यत्.. (८) हे अग्नि! तुम अपने अद्वितीय तेज द्वारा राक्षसों को समाप्त करो. तुम अपने सभी स्थानों में दीप्तिशाली बनो. (८) तं त्वा गीर्भिरुरुक्षया हव्यवाहं समीधिरे. यजिष्ठं मानुषे जने.. (९) अनेक यजमानों वाले हव्यवहनकर्त्ता एवं मानव समूह में सबसे अधिक यज्ञकर्त्ता अग्नि को स्तुति के साथ प्रज्वलित किया जाता है. (९) सूक्त—११९ देवता—लवरूपी इंद्र इति वा इति मे मनो गामश्वं सनुयामिति. कुवित्सोमस्यापामिति.. (१) मेरी इच्छा है कि मैं भी गाय और घोड़े का दान करूं. मैं कई बार सोमरस पी चुका हूं. (१) प्र वाताइव दोधत उन्मा पीता अयंसत. कुवित्सोमस्यापामिति.. (२) पिया हुआ सोमरस मुझे उसी प्रकार कंपित करता एवं ऊपर उठाता है, जिस प्रकार वायु को कंपाता है. मैं कई बार सोमरस पी चुका हूं. (२) उन्मा पीता अयंसत रथमश्वा इवाश्वः. कुवित्सोमस्यापामिति.. (३) पिए हुए सोमरस ने मुझे इस प्रकार ऊपर उठाया है, जिस प्रकार तेज चाल वाले घोड़े रथ को ऊपर उठाते हैं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (३) उप मा मतिरस्थित वाश्रा पुत्रमिव प्रियम्. कुवित्सोमस्यापामिति.. (४) जिस प्रकार गाय रंभाती हुई बछड़े के पास जाती है, उसी प्रकार स्तुतियां मेरे पास आती हैं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (४) अहं तष्टेव वन्धुरं पर्यचामि हृदा मतिम्. कुवित्सोमस्यापामिति.. (५) त्वष्टा जिस प्रकार रथ में सारथि के बैठने का स्थान बनाता है, उसी प्रकार मैं स्तोता के मन में स्तुति उत्पन्न करता हूं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (५) नहि मे अक्षिपच्चनाच्छान्त्सुः पञ्च कृष्टयः. कुवित्सोमस्यापामिति.. (६) पंचजन मेरे दृष्टिपात से बच नहीं सकते. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (६) ebook converter DEMO Watermarks*