भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1789, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1789

नहि मे रोदसी उभे अन्यं पक्षं चन प्रति. कुवित्सोमस्यापामिति.. (७) द्यावा-पृथिवी मेरे एक भाग के भी समान नहीं हैं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (७) अभि द्यां महिना भुवमभी३मां पृथिवीं महीम्. कुवित्सोमस्यापामिति.. (८) मैंने अपने महत्त्व से द्यौ एवं विशाल धरती को पराजित किया है. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (८) हन्ताहं पृथिवीमिमां नि दधानीह वेह वा. कुवित्सोमस्यापामिति.. (९) मैं धरती को एक स्थान से उठाकर दूसरे स्थान पर रख सकता हूं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (९) ओषमित्पृथिवीमहं जङ्घनानीह वेह वा. कुवित्सोमस्यापामिति.. (१०) मैं अपने तेज से धरती अथवा अन्य स्थान को जला सकता हूं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (१०) दिवि मे अन्यः पक्षोऽधो अन्यमचीकृषम्. कुवित्सोमस्यापामिति.. (११) मेरा एक भाग स्वर्ग में है एवं दूसरा मैंने धरती पर स्थिर किया है. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (११) अहमस्मि महामहोऽभिनभ्यमुदीषितः. कुवित्सोमस्यापामिति.. (१२) मैं अतिशय महान हूं तथा सूर्यरूप से आकाश में अभिगत हूं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (१२) गृहो याम्यरङ्कृतो देवेभ्यो हव्यवाहनः. कुवित्सोमस्यापामिति.. (१३) मैं हवि ग्रहण करता हूं, यजमानों द्वारा सुशोभित हूं एवं देवों के लिए हव्य वहन करता हूं. मैं अनेक बार सोमपान कर चुका हूं. (१३) सूक्त—१२० देवता—इंद्र तदिदास भुवनेषु ज्येष्ठं यतो जज्ञ उग्रस्त्वेष्णृम्णः. सद्यो जज्ञानो नि रिणाति शत्रूननु यं विश्वे मदन्त्यूमाः.. (१) इस भुवन में वही बड़ा था, जिससे उग्र एवं प्रदीप्त बल वाले सूर्यरूपी इंद्र उत्पन्न हुए हैं. ebook converter DEMO Watermarks*