भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 220, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 220

प्र यात शीभमाशुभिः सन्ति कण्वेषु वो दुवः. तत्रो षु मादयाध्वै.. (१४) हे मरुद्गणो! अपने तीव्रगामी वाहन के द्वारा यज्ञभूमि में शीघ्र आओ. बुद्धिमान् यजमानों के द्वारा की गई सेवा से उनके प्रति तृप्त बनो. (१४) अस्ति हि ष्मा मदाय वः स्मसि ष्मा वयमेषाम्. विश्वं चिदायुर्जीवसे.. (१५) हे मरुद्गणो! हमारे द्वारा दिया हुआ हवि तुम्हें तृप्त करने के लिए है. हम पूर्ण आयु जीने के लिए तुम्हारे सेवक बने हैं. (१५) सूक्त—३८ देवता—मरुद्गण कद्ध नूनं कधप्रियः पिता पुत्रं न हस्तयोः. दधिध्वे वृक्तबर्हिषः.. (१) हे मरुद्गणो! प्रार्थना चाहने वाले तुम लोगों के लिए कुश बिछा दिए गए हैं. जिस प्रकार पिता पुत्र को हाथों पर धारण करता है, क्या तुम भी हमें उसी प्रकार धारण करोगे? (१) क्व नूनं कद्धो अर्थं गन्ता दिवो न पृथिव्याः. क्व वो गावो न रण्यन्ति.. (२) हे मरुद्गणो! इस समय तुम कहां हो? तुम इस यज्ञ में कब आओगे? तुम यहां आकाश से आओ, धरती से मत आना. जिस प्रकार गाएं रंभाती हैं, उसी प्रकार यजमान तुम्हें यहां बुलाते हैं. (२) क्व वः सुम्ना नव्‍यांसि मरुतः क्व सुविता. क्वो३विश्वानि सौभगा.. (३) हे मरुद्गणो! तुम्हारी प्रजा पशुरूपी नवीन धन, मणि, मुक्ता आदि रूपी शोभन धन और गज, अश्व आदि रूपी सौभाग्य धन कहां है? (३) यद्द्यूं पृश्निमातरो मर्तासः स्यातने. स्तोता वो अमृतः स्यात्.. (४) हे पृश्नि नामक धेनु के पुत्र मरुद्गण! यद्यपि तुम मरणधर्मा हो, पर तुम्हारी स्तुति करने वाला अमर होगा. (४) मा वो मृगो न यवसे जरिता भूदजोष्‍यः. पथा यमस्य गादुप.. (५) घास के बीच में मृग जिस प्रकार सेवारहित नहीं रहता, अपितु घास खाता है, उसी प्रकार तुम्हारी स्तुति करने वाले तुम्हारी सेवा से कभी शून्य न हों. इस प्रकार वे यमराज के मार्ग पर नहीं जाएंगे. (५) मो षु णः परापरा निर्ऋतिर्दुर्हणा वधीत्. पदीष्ट तृष्णया सह.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*