भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 221, कुल 1855 में से

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हे मरुद्गण! अत्यंत शक्तिशाली पाप की देवी निर्ऋति का कोई विनाश नहीं कर सकता. वह हमारा वध न करे और हमारी तृष्णा के साथ ही समाप्त हो जाए. (६) सत्यं त्वेषा अमवन्तो धन्वञ्चिदा रुद्रियासः. मिहं कृण्वन्त्यवाताम्.. (७) रुद्र द्वारा पालित, दीप्तिसंपन्न एवं बलशाली मरुद्गण मरुस्थल में भी वायुरहित वर्षा करते हैं, यह बात सत्य है. (७) वाश्रेव विद्युन्मिमाति वत्सं न माता सिषक्ति. यदेषां वृष्टिरसर्जि.. (८) दूध भरे स्तनों वाली रंभाती हुई गाय के समान बिजली गरजती है. गाय जिस तरह बछड़े को चाटती है, उसी प्रकार बिजली मरुद्गणों की सेवा करती है. इसी के फलस्वरूप मरुद्गणों ने वर्षा की है. (८) दिवा चित्तमः कृण्वन्ति पर्जन्येनोदवाहेन. यत्पृथिवीं व्युन्दन्ति.. (९) मरुद्गण जल ढोने वाले बादलों की सहायता से दिन में भी अंधेरा कर देते हैं. वे उसी समय धरती को सींचते हैं. (९) अध स्वनान्मरुतां विश्वमा सद्म पार्थिवम्. अरेजिन्त प्र मानुषाः.. (१०) मरुद्गणों के गरजने की ध्वनि से धरती पर बने सभी घर एवं उन में रहने वाले मनुष्य कांपने लगते हैं. (१०) मरुतो वीळुपाणिभिश्चित्रा रोधस्वतीरनु. यातेमखिद्रयामभिः.. (११) हे मरुद्गणो! जिस प्रकार विचित्र किनारों वाली नदी बहती है, उसी प्रकार तुम अपने शक्तिशाली हाथों की सहायता से बिना रुके हुए चलते रहो. (११) स्थिरा वः सन्तु नेमयो रथा अश्वास एषाम्. सुसंस्कृता अभीशवः.. (१२) हे मरुद्गणो! तुम्हारी नेमि, रथ और घोड़े शक्तिशाली हों. तुम्हारी उंगलियां सावधानी से घोड़ों की लगाम पकड़ें. (१२) अच्छा वदा तना गिरा जराये ब्रह्मणस्पतिम्. अग्निं मित्रं न दर्शतम्.. (१३) हे ऋत्विजो! मंत्र के पालक मरुद्गण, अग्नि एवं दर्शनीय मित्र की प्रार्थना के लिए हमारे सामने ऐसे मंत्रों से स्तुति करो जो उन देवताओं का स्वरूप बताने वाले हों. (१३) मिमीहि श्लोकमास्ये पर्जन्य इव ततनः. गाय गायत्रमुक्थ्यम्.. (१४) हे ऋत्विजो! अपने मुंह से स्तोत्रों की रचना करो. जिस प्रकार बादल वर्षा का विस्तार ebook converter DEMO Watermarks*