भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 222, कुल 1855 में से

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करते हैं, उसी प्रकार तुम उस स्तोत्र के श्लोकों को बढ़ाओ, तुम गायत्री छंद द्वारा निर्मित शास्त्रसम्मत स्तोत्र को पढ़ो. (१४) वन्दस्व मारुतं गणं त्वेषं पनस्युमर्किणम्. अस्मे वृद्धा असन्निह.. (१५) हे ऋत्विजो! प्रकाशयुक्त, स्तुतियोग्य एवं सब लोगों द्वारा अर्चित मरुद्गणों की तुम वंदना करो, जिससे वे हमारे इस यज्ञ में वृद्धि को प्राप्त हों. (१५) सूक्त—३९ देवता—मरुद्गण प्र यदिस्था परावतः शोचिर्न मानमस्यथ. कस्य क्रत्वा मरुतः कस्य वर्पसा कं याथ कं ह धूतयः.. (१) हे कंपनकारी मरुद्गणो! जिस प्रकार सूर्य आकाश से अपनी तेज रोशनी धरती पर फेंकता है, उसी प्रकार जब तुम दूर आकाश से अपनी शक्ति धरती पर डालते हो तो तुम किस यज्ञ में किस यजमान द्वारा आकर्षित किए जाते हो तथा किस यजमान के समीप जाते हो? (१) स्थिरा वः सन्त्वायुधा पराणुदे वीळू उत प्रतिष्कभे. युष्माकमस्तु तविषी पनीयसी मा मर्त्यस्य मायिनः.. (२) हे मरुद्गणो! तुम्हारे आयुध शत्रु विनाश के लिए स्थिर और शत्रुओं को रोकने के लिए दृढ़ हों. तुम्हारी शक्ति स्तुति करने योग्य हो, हमारे प्रति धोखा करने वाले शत्रुओं की शक्ति प्रशंसनीय न हो. (२) परा ह यत्स्थिरं हथ नरो वर्तयथा गुरु. वि याथन वनिनः पृथिव्या व्याशाः पर्वतानाम्.. (३) हे नेताओ! जब तुम वृक्षादि स्थिर वस्तु को तोड़ते हुए एवं पत्थर आदि भारी वस्तुओं को हिलाते हुए चलते हो, तब पृथ्वी पर खड़े वनों के बीच से तथा पर्वतों के बगल वाले मार्ग से चलते हो. (३) नहि वः शत्रुर्विविदे अधि द्यवि न भूम्यां रिशादसः. युष्माकमस्तु तविषि तना युजा रुद्रासो नू चिदाधृषे.. (४) हे शत्रुनाशकारी! धरती और आकाश में तुम्हारा कोई शत्रु नहीं हुआ. हे रुद्रपुत्रो! तुम सबकी सम्मिलित शक्ति शत्रुओं का दमन करने के लिए विस्तृत हो. (४) प्र वेपयन्ति पर्वतान्वि विञ्चन्ति वनस्पतीन्. प्रो आरत मरुतो दुर्मदा इव देवासः सर्वया विशा.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*