भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 223, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 223

मरुद्गण पर्वतों को भली प्रकार कंपित करते एवं वृक्षों को एक-दूसरे से अलग करते हैं. हे देवो! जिस प्रकार मतवाले लोग स्वेच्छा से सब जगह जाते हैं. उसी प्रकार तुम भी प्रजाओं के साथ सर्वत्र जाते हो. (५) उपो रथेषु पृषतीरयुग्ध्वं प्रष्टिर्वहति रोहितः. आ वो यामाय पृथिवी चिदश्रोदबीभयन्त मानुषाः.. (६) तुम बुंदकियों वाले हरिणों को अपने रथ में जोतते हो. लाल हरिण तुम्हारे रथ के जुए को खींचता है. तुम्हारे आने की ध्वनि धरती और आकाश ने सुनी है तथा मनुष्य भयभीत हो उठे हैं. (६) आ वो मक्षू तनाय कं रुद्रा अवो वृणीमहे. गन्ता नूनं नोऽवसा यथा पुरेत्था कण्वाय बिभ्युषे.. (७) हे रुद्रपुत्रो! हम पुत्र-प्राप्ति के लिए तुम्हारी रक्षणशक्ति की शीघ्र प्रार्थना करते हैं. पहले किए गए यज्ञों में हमारी रक्षा के लिए तुम जिस प्रकार आए थे, उसी प्रकार भयभीत एवं बुद्धिमान् यजमान की रक्षा के लिए उनके समीप आओ. (७) युष्मेषितो मरुतो मर्त्येषित आ यो नो अभ्व ईषते. वि तं युयोत शवसा व्योजसा वि युष्माकाभिरूतिभिः.. (८) हे मरुद्गणो! तुम्हारी अथवा किसी अन्य पुरुष की प्रेरणा से जो भी शत्रु हमारे सामने आवे, तुम उसका बल और अन्न छीन लो और उससे अपनी रक्षा भी वापस कर लो. (८) असामि हि प्रयुज्यवः कण्वं दद प्रचेतसः. असामिभिर्मरुत आ न ऊतिभिर्गन्ता वृष्टिं न विद्युत:.. (९) हे मरुद्गणो! तुम पूर्ण रूप से यज्ञपात्र एवं परम ज्ञानसंपन्न हो. तुम यजमान को धारण करो. जिस प्रकार बिजली वर्षा लेकर आती है, उसी प्रकार तुम अपनी पूरी शक्ति से हमारी रक्षा करने को आओ. (९) असाम्योजो बिभृथा सुदानवोऽसामि धूतयः शवः. ऋषिद्विषे मरुतः परिमन्यव इषुं न सृजत द्विषम्.. (१०) हे शोभन दान करने वाले मरुतो! तुम अपनी समस्त शक्ति धारण करो. हे कंपनकर्त्ताओं! ऋषियों से द्वेष करने वाले एवं क्रोधी शत्रु के प्रति बाण के समान अपना क्रोध व्यक्त करो. (१०) सूक्त—४० देवता—ब्रह्मणस्पति ebook converter DEMO Watermarks*