ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 226, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे नेतारूप आदित्यो! तुम सरल मार्ग से जिस यज्ञ में आते हो, उस में तुम्हें सोमरस का उपभोग मिले. (५) स रत्नं मर्त्यो वसु विश्वं तोकमुत त्मना. अच्छा गच्छत्यस्तृतः.. (६) तुम्हारे द्वारा अनुगृहीत यजमान तुम्हारे सामने ही सभी रमणीय धन प्राप्त करता है. कोई उसकी हिंसा नहीं कर सकता, अपितु वह अपने समान संतान भी प्राप्त करता है. (६) कथा राधाम सखायः स्तोमं मित्रस्यार्यम्णः. महि प्सरो वरुणस्य.. (७) हे ऋत्विज् मित्रो! हम मित्र, अर्यमा और वरुण के महत्त्व के अनुरूप स्तोत्र कब प्राप्त करेंगे? (७) मा वो घ्नन्तं मा शपन्तं प्रति वोचे देवयन्तम्. सुम्नैरिद्ध आ विवासे.. (८) हे मित्रादि देवो! देवों की कामना करने वाले यजमान को मारने वाले एवं कटु वचन बोलने वाले मनुष्य के विरुद्ध मैं कुछ नहीं कहता. मैं तो तुम्हें धन से तृप्त करता हूं. (८) चतुरश्चिद्ददमानाद्विभीयादा निधातोः. न दुरुक्ताय स्पृहयेत्.. (९) जुए के खेल में चार कौड़ियां हाथ में रखने वाले से लोग तभी तक डरते हैं, जब तक वह उन्हें फेंक नहीं देता, उसी प्रकार यजमान दूसरे की निंदा नहीं करना चाहता, अपितु उससे डरता है. (९) सूक्त—४२ देवता—पूषा सं पूषन्नध्वनस्तिर व्यंहो विमुचो नपात्. सक्ष्वा देव प्र णस्पुरः.. (१) हे पूषा! हमें मार्ग के पार लगा दो. पाप विघ्नों का कारण है, तुम उसे नष्ट करो. हे जलवर्षक मेघ के पुत्र! हमारे आगे चलो. (१) यो नः पूषन्नघो वृको दुःशेव आदिदेशति. अप स्म तं पथो जहि.. (२) हे पूषा! यदि कोई आक्रमणकारी, धन अपहरण करने वाला एवं दुष्ट शत्रु हमें गलत रास्ता दिखाता है तो उसे हमारे मार्ग से हटा दो. (२) अप त्यं परिपन्थिनं मुषीवाणं हुरश्चितम्. दूरमधि सुतेरज.. (३) तुम हमारा रास्ता रोकने वाले चोर एवं कुटिल व्यक्ति को हमारे मार्ग से दूर भगा दो. (३) त्वं तस्य द्वयाविनोऽघशंसस्य कस्य चित्. पदाभि तिष्ठ तपुषिम्.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*