ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 227, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे देव! हमारे सामने और पीठ पीछे दोनों प्रकार से हमारा धन हरण करने वाले अनिष्टसाधक चोर के परपीड़क शरीर को अपने पैरों से कुचल दो. (४) आ तत्ते दस्र मन्तुमः पूषन्नवो वृणीमहे. येन पितॄनचोदयः.. (५) हे ज्ञानसंपन्न एवं शत्रुनाशक पूषा! तुमने जिस रक्षाशक्ति से अंगिरा आदि पूर्वजों को प्रेरित किया था, हम तुम्हारी उसी शक्ति की प्रार्थना करते हैं. (५) अधा नो विश्वसौभग हिरण्यवाशीमत्तम. धनानि सुषणा कृधि.. (६) हे सर्वसंपत्तिशाली एवं सुवर्णमय आयुधों वाले पूषा! हमारी प्रार्थना के पश्चात् हमें भांति-भांति का धन देना. (६) अति नः सश्चतो नय सुगा नः सुपथा कृणु. पूषन्निह क्रतुं विदः.. (७) हमें बाधा पहुंचाने के लिए आए हुए शत्रुओं से हमें दूर ले जाओ. हमारा मार्ग सुगम और शोभन बनाओ. हे पूषा! इस मार्ग में हमारी रक्षा का उत्तरदायित्व तुम्हारा है. (७) अभि सूयवसं नय न नवज्वारो अध्वने. पूषन्निह क्रतुं विदः.. (८) तुम हमें घास वाले सुंदर देश में ले जाओ. हमें मार्ग में कोई नया कष्ट न हो. हे पूषा! इस मार्ग में हमारी रक्षा के विषय में तुम्हीं जानते हो. (८) शग्धि पूर्धि प्र यंसि च शिशीहि प्रास्युदरम्. पूषन्निह क्रतुं विदः.. (९) हे पूषा! हम पर अनुग्रह करके हमारे घरों को धनधान्य से भर दो, हमें अन्य इच्छित वस्तुएं देकर परम तेजस्वी बनाओ एवं उत्तम अन्न से हमारी उदरपूर्ति करो. हे पूषा! इस मार्ग में हमारी रक्षा का उपाय तुम्हें ही करना है. (९) न पूषणं मेथामसि सूक्तैरभि गृणीमसि. वसूनि दस्ममीमहे.. (१०) हम पूषा की निंदा नहीं करते, अपितु सूक्तों से उनकी स्तुति करते हैं. हम दर्शनीय पूषा से धन की याचना करते हैं. (१०) सूक्त—४३ देवता—रुद्र आदि कद्रुद्राय प्रचेतसे मीळ्हुष्टमाय तव्यसे. वोचेम शन्तमं हृदे.. (१) प्रकृष्ट ज्ञान युक्त, मनोकामना पूर्ण करने वाले, अत्यंत महान् एवं हृदय में निवास करने वाले रुद्र को लक्ष्य करके हम कब सुखकर स्तोत्र पढ़ेंगे? (१) ebook converter DEMO Watermarks*