भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 228, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 228

यथा नो अदितिः करत्पश्वे नृभ्यो यथा गवे. यथा तोकाय रुद्रियम्.. (२) अदिति येन-केन प्रकारेण हमें, पशुओं को, मनुष्यों को, गायों को और हमारी संतान को रुद्र संबंधी ओषधि प्रदान करें. (२) यथा नो मित्रो वरुणो यथा रुद्रश्चिकेतति. यथा विश्वे सजोषसः.. (३) मित्र, वरुण, रुद्र और परस्पर समान प्रीति रखने वाले अन्य सब देवता हमारे ऊपर कृपा करें. (३) गाथपतिं मेधपतिं रुद्रं जलाषभेषजम्. तच्छंयोः सुम्नमीमहे.. (४) स्तुतिपालक, यज्ञरक्षक एवं सुखकारी ओषधियों से युक्त रुद्र के समीप हम बृहस्पतिपुत्र शंयु के समान सुखों की याचना करते हैं. (४) यः शुक्र इव सूर्यो हिरण्यमिव रोचते. श्रेष्ठो देवानां वसुः.. (५) जो रुद्र सूर्य के समान दीप्तिमान् एवं सोने के समान चमकीले हैं, वे देवताओं में श्रेष्ठ एवं उनके निवास के कारण हैं. (५) शं नः करत्यर्वते सुगं मेषाय मेष्ये. नृभ्यो नारिभ्यो गवे.. (६) देवगण, हमारे घोड़ों, मेष, भेड़, पुरुष, स्त्री और गायों के लिए सुलभ सुख प्रदान करें. (६) अस्मे सोम श्रियमधि नि धेहि शतस्य नृणाम्. महि श्रवस्तुविनृम्णम्.. (७) हे सोमदेव! हमें सौ मनुष्यों के बराबर पर्याप्त धन तथा प्रभूत बलयुक्त एवं महान् अन्न दो. (७) मा नः सोम परिबाधो मारातयो जुहुरन्त. आ न इन्दो वाजे भज.. (८) सोम के विरोधी एवं शत्रु हमारी हिंसा न करें. हे इंद्र देव! हमें अन्न दो. (८) यास्ते प्रजा अमृतस्य परस्मिन्धामन्नृतस्य. मूर्धा नाभा सोम वेन आभूषन्तीः सोम वेदः.. (९) हे सोम! मरणरहित एवं उत्तम स्थान प्राप्त करने वाले तुम सब देवों के शिरोमणि बनकर अपनी प्रजाओं की कामना करो. वह प्रजा तुम्हें सुशोभित करती है, तुम उसका ध्यान रखो. (९) सूक्त—४४ देवता—अग्नि आदि ebook converter DEMO Watermarks*