भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 350, कुल 1855 में से

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अनु पूर्वाः कृपते वावशाना प्रदीध्याना जोषमन्याभिरेति.. (१०) पता नहीं कितने समय से उषा उत्पन्न हो रही है और कितने समय तक उत्पन्न होती रहेगी? वर्तमान उषा पूर्ववर्तिनी उषाओं का अनुकरण करती है तथा आगामिनी उषाएं इसके प्रकाश का अनुवर्तन करेंगी. (१०) ईयुष्टे ये पूर्वतरामपश्यन्व्युच्छन्तीमुषसं मर्त्यासः. अस्माभिरू नु प्रतिचक्ष्याभूदो ते यन्ति ये अपरीषु पश्यान्.. (११) जिन मनुष्यों ने अतिशय पूर्ववर्तिनी उषाओं को प्रकाश करते देखा था, वे समाप्त हो गईं. उषा हमारे द्वारा इस समय देखी जाती है. होने वाली उषाओं को जो लोग देखेंगे, वे आ रहे हैं. (११) यावयद्द्वेषा ऋतपा ऋतेजाः सुम्नावरी सूनृता ईरयन्ती. सुमङ्गलीर्बिभ्रती देववीतिमिहाद्योषः श्रेष्ठतमा व्युच्छ.. (१२) हे उषा! तुम हमसे द्वेष करने वालों को दूर हटाने वाली, सत्य की पालनकर्त्री, यज्ञ के निमित्त उत्पन्न सुखयुक्त वचनों की प्रेरक, कल्याणसहिता एवं देवों के अभिलषित यज्ञ को धारण करने वाली हो, तुम उत्तम प्रकार से आज इस स्थान को प्रकाशित करो. (१२) शश्वत्पुरोषा व्युवास देव्यथो अद्येदं व्यावो मघोनी. अथो व्युच्छादुत्तराँ अनु द्यूनजरामृता चरति स्वधाभिः.. (१३) देवी उषा पूर्वकाल में प्रतिदिन प्रकाश देती थी, धन की स्वामिनी उषा आज भी इस विश्व को अंधकार से छुटकारा दिलाती है एवं इसी प्रकार भविष्य के दिनों में प्रकाश प्रदान करेगी. वह जरा एवं मरण से रहित होकर अपने तेज से विचरण करती है. (१३) व्य१ञ्जिभिर्दिव आतास्वद्यौदप कृष्णां निर्णिजं देव्यावः. प्रबोधयन्त्यरुणेभिरश्वैरोषा याति सुयुजा रथेन.. (१४) आकाश की विस्तृत दिशाओं में उषा प्रकाशक तेजों से उदित होती है एवं उसने रात्रि द्वारा निर्मित काला रूप समाप्त कर दिया है. वह सोते हुए प्राणियों को जगाती हुई लाल रंग के घोड़ों वाले अपने रथ से आ रही है. (१४) आवहन्ती पोष्या वार्याणि चित्रं केतुं कृणुते चेकिताना. ईयुषीणामुपमा शश्वतीनां विभातीनां प्रथमोषा व्यश्वैत्.. (१५) उषा पोषण समर्थ, वरणीय धनों को लाती हुई एवं समस्त मनुष्यों को चेतनायुक्त करती हुई विचित्र किरणें प्रकाशित करती है. पूर्ववर्तिनी उषाओं की उपमान एवं आगामिनी विशेष प्रकाशयुक्त उषाओं की प्रथमा यह उषा अपने तेज से बढ़ती है. (१५) ebook converter DEMO Watermarks*