भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 362, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 362

सरलतापूर्वक सागर के पार जाकर तुम्हारी स्तुति की थी. हे मनोवेगयुक्तो एवं कामवर्षको! तुम शोभन अश्वों वाले रथ द्वारा क्षेमपूर्वक भुज्यु को लाए थे. (१५) अजोहवीदश्विना वर्तिका वामास्नो यत्सीममुञ्चतं वृकस्य. वि जयुषा ययथुः सान्वद्रेर्जातं विष्वाचो अहतं विषेण.. (१६) हे अश्विनीकुमारो! वर्तिका ने उस समय तुम दोनों का आह्वान किया था, जिस समय तुमने वृक के मुख से उसे बचाया था. तुम अपने जयशील रथ द्वारा जाहुष को लेकर पर्वत की चोटियों पर चले गए थे एवं विष्वाच राक्षस के पुत्र को तुमने विष से मारा था. (१६) शतं मेषान्वृक्ये मामहानं तमः प्रणीतमशिवेन पित्रा. आक्षी ऋज्राश्वे अश्विनावधत्तं ज्योतिरन्धाय चक्रथुर्विचक्षे.. (१७) हे अश्विनीकुमारो! वृकों के निमित्त सौ मेषों को समर्पित करने वाले एवं दुःखदायी पिता द्वारा अंधे बनाए गए ऋजाश्व को तुमने नेत्र दिए एवं उस अंधे को संसार देखने योग्य बनाया. (१७) शुनमन्धाय भरमह्वयत्सा वृकीरश्विना वृषणा नरेति. जारः कनीन इव चक्षदान ऋज्राश्वः शतमेकं च मेषान्.. (१८) हे नेताओ एवं कामवर्षी अश्विनीकुमारो! दृष्टिहीन को पोषण का कारणभूत सुख देने की इच्छा से वृकी ने तुम्हें बुलाया था, क्योंकि ऋजाश्व ने उसी प्रकार एक सौ एक मेष के टुकड़े करके मुझे दिए हैं, जिस प्रकार यौवन प्राप्त कामुक किसी परस्त्री को बहुत सा धन देता है. (१८) मही वामूतिरश्विना मयोभूरूत स्रामं धिष्ण्या सं रिणीथः. अथा युवामिदह्वयत्पुरन्धिरागच्छतं सीं वृषणाववोभिः.. (१९) हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारा महान् रक्षाकार्य सुख का कारण है. हे स्तुतिपात्रो! तुमने व्याधित पुरुषों को स्वस्थ शरीर वाला बनाया था. बहुबुद्धिसंपन्ना घोषा ने रोग नाश के निमित्त तुम्हीं को बुलाया था. हे कामवर्षको! अपने रक्षणकार्य सहित यहां आओ. (१९) अधेनुं दस्रा स्तर्य१ं विषक्तामपिन्वतं शयवे अश्विना गाम्. युवं शचीभिर्विमदाय जायां न्यूहथुः पुरुमित्रस्य योषाम्.. (२०) हे दर्शनीयो! तुमने विशेषरूप से कृश अंगों वाली, निवृत्तप्रसवा एवं दुग्धहीना गाय को शंयु के निमित्त दुधारू बनाया था. तुमने अपने कर्मों द्वारा पुरुमित्र की कन्या को विमद ऋषि की पत्नी बनाया था. (२०) यवं वृकेणाश्विना वपन्तेषं दुहन्ता मनुषाय दस्रा. ebook converter DEMO Watermarks*