भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 363, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 363

अभि दस्युं बकुरेणा धमन्तोरु ज्योतिश्चक्रथुरायर्याय.. (२१) हे दर्शनीय अश्विनीकुमारो! तुमने विद्वान् मनु के लिए हल द्वारा जुते हुए खेत में जौ बोए, अन्न की हेतुभूत वर्षा की एवं भासमान वज्र द्वारा दस्युओं का नाश करके अपना माहात्म्य विस्तृत किया. (२१) आथर्वणायाश्विना दधीचेऽश्व्यं शिरः प्रत्यैरयतम्. स वां मधु प्र वोचदृतायन्त्वाष्ट्रं यदस्रावपिकक्ष्यं वाम्.. (२२) हे अश्विनीकुमारो! तुमने अथर्वा के पुत्र दधीचि के धड़ पर घोड़े का सिर लगाया था. उसने पूर्वकृत प्रतिज्ञा को सत्य बनाते हुए त्वष्टा से प्राप्त मधुविद्या तुम्हें बताई थी. हे दर्शनीयो! वही तुम लोगों से संबंधित प्रवर्ग्य नामक विद्या बनी. (२२) सदा कवी सुमतिमा चके वां विश्वा धियो अश्विना प्रावतं मे. अस्मे रयिं नासत्या बृहन्तमपत्यसाचं श्रुत्यं रराथाम्.. (२३) हे क्रांतदर्शी अश्विनीकुमारो! मैं तुम्हारी कल्याणकारिणी अनुग्रह बुद्धि की सदा प्रार्थना करता हूं. तुम मेरे सभी कर्मों की रक्षा करो. हे दर्शनीयो! हमें महान्, संतानयुक्त एवं प्रशंसनीय धन दो. (२३) हिरण्यहस्तमश्विना रराणा पुत्रं नरा वधिमत्या अदत्तम्. त्रिधा ह श्यावमश्विना विकस्तमुज्जीवस ऐरयतं सुदानू... (२४) हे दाता एवं नेता अश्विनीकुमारो! तुमने तीन भागों में विच्छिन्न श्याव को जीवन दिया है. (२४) एतानि वामश्विना वीर्याणि प्र पूर्व्याण्यायवोऽवोचन्. ब्रह्म कृण्वन्तो वृषणा युवभ्यां सुवीरासो विदथमा वदेम.. (२५) हे अश्विनीकुमारो! मेरे द्वारा कहे गए तुम्हारे इन वीर-कर्मों को प्राचीन लोगों ने कहा है. हे कामवर्षको! तुम्हारी स्तुति करते हुए हम शोभन वीरों से युक्त होकर यज्ञ के अभिमुख हों. (२५) सूक्त—११८ देवता—अश्विनीकुमार आ वां रथो अश्विना श्येनपत्वा सुमृळीकः स्ववाँ यात्वर्वाङ्. यो मर्त्यस्य मनसो जवीयान्त्रिवन्धुरो वृषणा वातरंहाः.. (१) हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारा घोड़ों से चलने वाला सुखयुक्त एवं धनयुक्त रथ हमारे सामने आए. हे कामवर्षको! वह मानव मन के समान वेगवान् त्रिबंधुर एवं वायु के समान तीव्रगामी ebook converter DEMO Watermarks*