ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 407, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंइच्छाओं को जानती हैं. ऐसी ज्वालाएं बार-बार बढ़कर दिव्य अग्नि को प्राप्त होती हैं एवं अग्नि के साथ ही धरती और आकाश का रूप तेजोमय बना देती हैं. (७) तमग्रुवः केशिनीः सं हि रेभिर ऊर्ध्वास्तस्थुर्मृषीः प्रायवे पुनः. तासां जरां प्रमुञ्चन्नेति नानददसुं परं जनयञ्जीवमस्तृतम्.. (८) आगे स्थित केशों के समान ज्वालाएं अग्नि का आलिंगन करती हैं. ज्वालाएं मरी हुई होने पर भी आने वाले अग्नि के स्वागत के लिए ऊपर उठती हैं, अग्नि ऐसी शिखाओं का बुढ़ापा दूर करके उन्हें अतिशय शक्तिशाली एवं प्राणधारण के योग्य बनाते हुए बार-बार गर्जन करते हैं. (८) अधीवासं परि मातू रिहन्नह तुविग्रेभिः सत्वभिर्याति वि ज्रयः. वयो दधत्पद्वते रेरिहत्सदानु श्येनी सचते वर्तनीरह.. (९) यह अग्नि धरती माता को वस्त्रों के समान ढकने वाली झाड़ियों को चारों ओर से चाटते हुए महान् शब्द करने वाले प्राणियों के साथ तेजी से भांति-भांति का गमन करते हैं. वह चरणों वाले अर्थात् मनुष्यों और पशुओं को खाने की वस्तुएं देते तथा तृणादि को जलाते हुए उस स्थान को काला कर देते हैं, जिससे चलकर आते हैं. (९) अस्माकमग्ने मघवत्सु दीदिह्यध श्वसीवान्वृषभो दमूनाः. अवास्या शिशुमतीरदीदेर्वेर्मेव युत्सु परिजर्भुराणः.. (१०) हे अग्नि! तुम हमारे धनसंपन्न घरों में प्रज्वलित होओ. इसके पश्चात् तुम कामवर्षी एवं दानाभिलाषी होकर ज्वाला रूपी सांसें इधर-उधर छोड़ते हुए बच्चों जैसी चंचल बुद्धि त्याग दो एवं संग्राम में कवच के समान शत्रुओं से बार-बार हमारी रक्षा करते हुए जल उठो. (१०) इदमग्ने सुधितं दुर्धितादधि प्रियादु चिन्मन्मनः प्रेयो अस्तु ते. यत्ते शुक्रं तन्वो३ रोचते शुचि तेनास्मभ्यं वनसे रत्नमा त्वम्.. (११) हे अग्नि! कठोर काठ के ऊपर रखा हुआ जो हवि तुम्हें भली प्रकार दिया गया है, वह तुम्हें प्रिय वस्तु से भी अधिक प्रिय हो. तुम्हारे ज्वलारूपी शरीर से जो भी तेज प्रकाशित होता है, उसके साथ-साथ हमारे लिए रत्न दो. (११) रथाय नावमुत नो गृहाय नित्यारित्रां पद्धतीं रास्यग्ने. अस्माकं वीराँ उत नो मघोनो जनाँश्च या पारयाच्छर्म या च.. (१२) हे अग्नि! हमारे गमनशील यजमान को संसार से पार उतारने वाली यज्ञ रूपी नाव दो. ऋत्विज् उसके डांड एवं मंत्र उसके चरण हैं. वह हमारे वीर पुत्रों एवं संपत्तिशाली लोगों को पार लगाएगी तथा कल्याण करेगी. (१२) ebook converter DEMO Watermarks*