ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 431, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंउरुव्यचसा महिनी असश्चता पिता माता च भुवनानि रक्षतः. सुधृष्टमे वपुष्ये३ न रोदसी पिता यत्सीमभि रूपैरवासयत्.. (२) विस्तीर्ण, महान् एवं एक-दूसरे से अलग, माता एवं पितारूप धरती-आकाश समस्त प्राणियों की रक्षा करते हैं. अत्यंत शक्तिसंपन्न धरती-आकाश शरीरधारियों के हित के लिए चेष्टा करते हैं एवं माता-पिता के समान सबको रूपनिर्माण से अनुगृहीत करते हैं. (२) स वह्निः पुत्रः पित्रोः पवित्रवान्पुनाति धीरो भुवनानि मायया. धेनुं च पृश्निं वृषभं सुरेतसं विश्वाहा शुक्रं पयो अस्य दुक्षत.. (३) पावन, रश्मियुक्त, धीर, फल धारण करने वाले एवं अपनी बुद्धि से समस्त प्राणियों को पवित्र करने वाले सूर्य माता-पिता तुल्य धरती और आकाश के पुत्र हैं. वे धरतीरूपी शुक्लवर्ण धेनु और आकाशरूपी सामर्थ्यसंपन्न बैल को प्रकाशित करते हैं एवं आकाश से उज्ज्वल दूध दुहते हैं. (३) अयं देवानांमपसामपस्तमो यो जजान रोदसी विश्वशम्भुवा. वि यो ममे रजसी सुक्रतूययाजरेभिः स्कम्भनेभिः समानृचे.. (४) वे सूर्य देवों एवं कर्मकर्त्ताओं में अत्यंत श्रेष्ठ हैं. उन्होंने प्राणियों को सभी प्रकार से सुख देने वाले धरती और आकाश को उत्पन्न एवं शोभन कर्म की इच्छा से दोनों को विभक्त करके मजबूत खूंटों द्वारा स्थिर किया है. (४) ते नो गृणाने महिनी महि श्रवः क्षत्रं द्यावापृथिवी धासथो बृहत्. येनाभि कृष्टीस्ततनाम विश्वहा पनाय्यमोजो अस्मे समिन्वताम्.. (५) हमारे द्वारा जिन धरती और आकाश की स्तुति की जाती है, वे महान् हैं एवं हमें सर्वत्र प्रसिद्ध अन्न और यश देते हैं. इन्हीं के बल पर हमने पुत्र आदि प्रजाओं का विस्तार किया है. तुम हमें प्रशंसायोग्य शक्ति प्रदान करो. (५) सूक्त—१६१ देवता—ऋभु किमु श्रेष्ठः किं यविष्ठो न आजगन्किमीयते दूत्यं१ कद्यदूचिम. न निन्दिम चमसं यो महाकुलोऽग्ने भ्रातर्द्रुण इद्भूतिमुदिम.. (१) ऋभुओं ने अग्नि को देखकर आपस में कहा—"जो हमारे सामने आया है, यह हमसे अवस्था में बड़ा है या छोटा? क्या यह देवों का दूत बनकर आया है? इसे किस प्रकार निश्चित करें?" इसके पश्चात् वे अग्नि से बोले—"भ्राता अग्नि! हम चमस की निंदा नहीं करेंगे, क्योंकि यह महाकुल में उत्पन्न हुआ है. लकड़ी के बने इस चमस की प्राप्ति का हम वर्णन करेंगे." (१) ebook converter DEMO Watermarks*