ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 430, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंमैं यजमान यज्ञ के बढ़ाने वाले, विस्तृत यज्ञों में हमें सावधान करने वाले, देवपुत्रों द्वारा सेवित एवं शोभनकर्मयुक्त यजमानों वाले धरती व आकाश की विशेष रूप से स्तुति करता हूं. वे हमारे प्रति अनुग्रह बुद्धि रखते हुए उत्तम धन देते हैं. (१) उत मन्ये पितुरद्रुहो मनो मातुर्महि स्वतवस्तद्धवीमभिः. सुरेतसा पितरा भूम चक्रतुरुरु प्रजाया अमृतं वरीमभिः.. (२) मैं पुत्र के प्रति द्रोहहीन धरतीरूपी माता और आकाशरूपी पिता को आह्वान मंत्रों द्वारा अनुग्रहयुक्त मन वाला जानता हूं. ये दोनों माता-पिता अपने शोभन सामर्थ्य से यजमानों की विस्तृत रक्षा करते हुए पर्याप्त अमृत देते हैं. (२) ते सूनवः स्वपसः सुदंससो मही जज्ञुर्मातरा पूर्वचित्तये. स्थातुश्च सत्यं जगतश्च धर्मणि पुत्रस्य पाथः पदमद्वयाविनः.. (३) शोभन कर्म वाली और सुदर्शन प्रजाएं तुम्हारे द्वारा पूर्वकृत अनुग्रह को स्मरण करके तुम्हें महान् एवं माता के समान हितकारी जानती हैं. पुत्ररूप स्थावर और जंगम द्यावापृथिवी को अद्वितीय जानते हैं. तुम इनकी रक्षा का अबाध मार्ग बताओ. (३) ते मायिनो ममिरे सुप्रचेतसो जामी सयोनी मिथुना समोकसा. नव्यन्नव्यं तन्तुमा तन्वते दिवि समुद्रे अन्तः कवयः सुदीतयः.. (४) द्यावापृथ्वी सदा एक स्थान पर युगलरूप में रहने वाली ऐसी प्रजायुक्त एवं चेतनासंपन्न सगी बहिनें हैं, जिन्हें किरणें अलग-अलग करती हैं. अपने व्यापार को जानने वाली प्रकाशयुक्त रश्मियां चमकते हुए आकाश में विस्तृत होती हैं. (४) तद्राधो अद्य सवितुर्वरेण्यं वयं देवस्य प्रसवे मनामहे. अस्मभ्यं द्यावापृथिवी सुचेतुना रयिं धत्तं वसुमन्तं शतग्विनम्.. (५) हम यजमान सविता देव की अनुज्ञा से उस उत्तम धन को मांगते हैं. धरती और आकाश हमारे प्रति अनुग्रहबुद्धि के द्वारा निवास योग्य घर एवं सैकड़ों गायों के रूप में धन दें. (५) सूक्त—१६० देवता—द्यावा-पृथ्वी ते हि द्यावापृथिवी विश्वशम्भुव ऋतावरी रजसो धारयत्कवी. सुजन्मनी धिषणे अन्तरीयते देवो देवी धर्मणा सूर्यः शुचिः.. (१) शुद्ध एवं दीप्यमान सूर्य समस्त प्राणियों को सुख देने वाले, यज्ञसंपन्न, जल उत्पादन के प्रयत्नों सहित, शोभनजन्म वाले एवं अपने कार्यकुशल धरती और आकाश के बीच में अपनी विशेषताओं की रक्षा करता हुआ सदा गमन करता है. (१) ebook converter DEMO Watermarks*