भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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हे इंद्र! तुम्हारे हजारों प्रकार के रक्षण उपाय हजारों तरह से हमारे पास आवें. हे अश्वों के स्वामी! तुम्हारे हजारों तरह के प्रसिद्ध अन्न हमें प्राप्त हों. तुम्हारे पास जो हजारों प्रकार के धन हैं, वे हमें प्रसन्नता देने के लिए मिलें. हमें हजारों पशु प्राप्त हों. (१) आ नोऽवोभिर्मरुतो यान्त्वच्छा ज्येष्ठेभिर्वा बृहद्दिवाः सुमायाः. अध यदेषां नियुतः परमाः समुद्रस्य चिद्धनयन्त पारे.. (२) मरुद्गण रक्षा के साधनों सहित हमारे पास आवें. शोभन बुद्धि वाले मरुद्गण परम प्रसिद्ध एवं दीप्तिशाली धन के साथ हमारे समीप आवें. उनके नियुत नामक घोड़े समुद्र के उस पार रहते हुए भी धन धारण करते हैं. (२) मिम्यक्ष येषु सुधिता घृताची हिरण्यनिर्णिगुपरा न ऋषिः. गुहा चरन्ती मनुषो न योषा सभावती विदथ्येव सं वाक्.. (३) भली प्रकार स्थित, जल बरसाती हुई एवं सुनहरे रंग की बिजली मरुतों के साथ मेघमाला, छिपे हुए स्थान में रहने वाली राजपुरुष की पत्नी अथवा यज्ञीय वाणी के समान रहती है. (३) परा शुभ्रा अयासो यव्या साधारण्येव मरुतो मिमिक्षुः. न रोदसी अप नुदन्त घोरा जुषन्त वृधं सख्याय देवाः.. (४) जिस प्रकार युवक साधारण नारी से मिलते हैं, उसी प्रकार शोभन अलंकारों वाले परम वेगशाली एवं महान् मरुद्गण बिजली के साथ संगत होते हैं. भयंकर वर्षा करने वाले मरुद्गण धरती और आकाश का त्याग नहीं करते. देवगण मित्रता के कारण मरुतों की उन्नति का प्रयत्न करते हैं. (४) जोषद्वदीमसूर्या सचध्यै विषितस्तुका रोदसी नृमणाः. आ सूर्येव विधतो रथं गात्त्वेषप्रतीका नभसो नेत्या.. (५) बिखरे हुए बालों वाली मरुत्-पत्नी बिजली समागम के निमित्त इनकी सेवा करती है. जिस प्रकार सूर्य की पुत्री अश्विनीकुमारों के रथ पर सवार हुई थी, उसी प्रकार तेजस्वी शरीर वाली चंचल बिजली मरुतों के रथ पर बैठकर यज्ञस्थल पर आती है. (५) आस्थापयन्त युवतिं युवानः शुभे निमिश्लां विदथेषु पज्राम्. अर्को यद्वो मरुतो हविष्मान्गायद्गाथं सुतसोमो दुवस्यन्.. (६) नित्य तरुण मरुद्गण नियम से मिलन करने वाली एवं शक्तिशाली तरुणी बिजली को वर्षा के लिए अपने रथ पर बैठा लेते हैं. उसी समय पूजा के मंत्र बोलते हुए हव्यदाता एवं सोमरस निचोड़ने वाले यजमान मरुतों की सेवा करते हुए स्तुतियां पढ़ते हैं. (६) ebook converter DEMO Watermarks*