ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 461, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंभक्षण करो.” (५) सूक्त—१७१ देवता—मरुद्गण प्रति व एना नमसाहमेमि सूक्तेन भिक्षे सुमतिं तुराणाम्. रराणता मरुतो वेद्याभिर्नि हेळो धत्त वि मुचध्वमश्वान्.. (१) हे वेगशाली मरुतो! मैं अपना नमस्कार और स्तुति वचन लेकर तुम्हारे समीप आता हूं एवं तुम्हारी दया की याचना करता हूं. तुम स्तुतियों से चित्त प्रसन्न करो, क्रोध त्यागो और घोड़ों को रथ से अलग कर दो. (१) एष वः स्तोमो मरुतो नमस्वान्हृदा तष्टो मनसा धायि देवाः. उपेमा यात मनसा जुषाणा यूयं हिष्ठा नमस इदवृधासः.. (२) हे तेजस्वी मरुतो! तुम्हारे प्रति बोला जा रहा स्तोत्र अन्न सहित है. यह स्तोत्र तुम में श्रद्धा रखने वाली बुद्धि से निकला है, इसलिए हमारे प्रति कृपा करके मन से इसे सुनो एवं इसे स्वीकार करके शीघ्र आओ. तुम हविरूप अन्न की वृद्धि करने वाले हो. (२) स्तुतासो नो मरुतो मृळयन्तूत स्तुतो मघवा शम्भविष्ठः. ऊर्ध्वा नः सन्तु कोम्या वनान्यहानि विश्वा मरुतो जिगीषा.. (३) हे मरुतो! स्तुति सुनकर हमें सुखी करो. सर्वाधिक सुखदाता इंद्र हमें प्रसन्न करें. हे मरुतो! हम जितने दिन जीवित रहें, वे दिन सबसे अधिक उत्तम, चाहने योग्य एवं भोगपूर्ण हों. (३) अस्मादहं तविषादीषमाणा इन्द्राद्भिया मरुतो रेजमानः. युष्मभ्यं हव्या निशितान्यासन्तान्यारे चक्रमा मृळता नः.. (४) हे मरुतो! हम इस बलवान् इंद्र के भय से कांपते हुए भागने लगे. हमने तुम्हारे लिए जो हवि तैयार किया था, उसे दूर कर लिया. तुम हमारी रक्षा करो. (४) येन मानासश्चितयन्त उस्रा व्युष्टिषु शवसा शश्वतीनाम्. स नो मरुद्भिर्वृषभ श्रवो धा उग्र उग्रेभिः स्थविरः सहोदाः.. (५) हे इंद्र! तुझ बलशाली के अनुग्रह से अभिमानपूर्ण किरणें नित्य प्रति उषाकाल होने पर प्राणियों को जगा देती हैं. हे कामवर्षी, उग्र, शत्रुओं को हराने वाले बल के दाता एवं पुरातन इंद्र! तुम परम बलशाली मरुतों के साथ मिलकर हमें अन्न दो. (५) त्वां पाहीन्द्र सहीयसो नॄन्भवा मरुद्भिरवयातहेळाः. सुप्रकेतेभिः सासहिर्दधानो विद्यामेषं वृजनं जीरदानुम्.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*