भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 462, कुल 1855 में से

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हे इंद्र! तुम मरुतों की रक्षा करो. तुम्हारी कृपा से ही वे अधिक शक्तिशाली बने हैं. मरुतों के साथ-साथ हमारे प्रति भी क्रोधरहित बनो. शोभन बुद्धि वाले मरुतों के साथ मिलकर तुम शत्रुओं को हराते हुए हमारे प्रति कृपालु बनो. हम अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त करें. (६) सूक्त—१७२ देवता—मरुद्गण चित्रो वोऽस्तु यामश्चित्र ऊती सुदानवः. मरुतो अभिभानवः.. (१) हे मरुतो! हमारे यज्ञ में तुम्हारा आगमन आश्चर्यजनक हो. हे शोभन दान एवं उत्तम प्रकाश वाले मरुतो! आपका शुभ आगमन हमारी रक्षा करे. (१) आरे सा वः सुदानवो मरुत ऋञ्जती शरुः. आरे अश्मा यमस्यथ.. (२) हे शोभनदानशील मरुतो! तुम्हारे चमकते हुए एवं हिंसक आयुध हमसे दूर रहें. तुम्हारे द्वारा फेंका गया पाषाणमय आयुध हमसे दूर रहे. (२) तृणस्कन्दस्य नु विशः परिवृङ्क्त सुदानवः. ऊर्ध्वान्नः कर्त जीवसे.. (३) हे शोभन दान वाले मरुतो! यद्यपि मेरी प्रजा तिनकों के समान तुच्छ हैं तथापि उनकी रक्षा करो तथा हमें चिरकाल तक जीवित रहने के लिए उन्नत करो. (३) सूक्त—१७३ देवता—इंद्र गायत्साम नभन्यं१ यथा वेरर्चाम तद्वावृधानं स्वर्वत्. गावो धेनवो बर्हिष्यदब्धा आ यत्सद्मानं दिव्यं विवासान्.. (१) हे इंद्र! उद्गाता सामवेद को इस प्रकार गाता है कि वह आकाश में गूंज जाए और आप उसे समझ लें. हम उस बढ़ते हुए सामगान की पूजा स्वर्ग के समान करते हैं. जिस प्रकार दुधारू और हिंसारहित गाएं अपने स्थान पर बैठती हैं, उसी प्रकार मैं तुम्हारी सेवा करता हूं. (१) अर्चद्वृषा वृषभिः स्वेदुहव्यैर्मृगो नाश्वो अति यज्जगुर्यात्. प्र मन्द्युर्मनां गूर्त होता भरते मर्यो मिथुना यजत्रः.. (२) यजमान हव्य देने वाले अध्वर्यु को साथ लेकर इंद्र की पूजा करते हैं. वे सोचते हैं कि इंद्र प्यासे मृग के समान हव्य के प्रति शीघ्र आ जाएंगे. हे बलशाली इंद्र! स्तोत्र की इच्छा करने वाले देवों की स्तुति करता हुआ होता, यजमान एवं उसकी पत्नी भली प्रकार यज्ञ पूरा करते हैं. (२) ebook converter DEMO Watermarks*