भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 469, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 469

धन आदि द्वारा सभी मनुष्यों को प्रसन्न करने वाले, कामवर्षी, सब लोगों के स्वामी एवं बहुतों द्वारा स्तुत इंद्र हमारे पास आवें. हे इंद्र! हमारी स्तुति सुनकर हव्य अन्न की इच्छा करते हुए दोनों कामवर्षी घोड़ों को रथ में जोड़कर हमारी रक्षा के लिए सामने आओ. (१) ये ते वृषणो वृषभास इन्द्र ब्रह्मयुजो वृषरथासो अत्याः. ताँ आ तिष्ठ तेभिरा याह्यर्वाङ् हवामहे त्वा सुत इन्द्र सोमे.. (२) हे इंद्र! तुम्हारे घोड़े तरुण, उत्तम, कामवर्षी, मंत्रयुक्त एवं रथ में जोड़ने योग्य हैं. तुम उन पर सवार होकर, उनके साथ हमारे सम्मुख आओ. (२) आ तिष्ठ रथं वृषणं वृषा ते सुतः सोमः परिषिक्ता मधूनि. युक्त्वा वृषभ्यां वृषभ क्षितीनां हरिभ्यां याहि प्रवतोप मद्रिक्.. (३) हे इंद्र! अपने कामवर्षी रथ पर बैठो, क्योंकि तुम्हारे लिए निचोड़ा हुआ सोमरस और मधुर घृत तैयार है. हे कामवर्षी इंद्र! अपने घोड़ों को रथ में जोड़ो और सत्कर्म करने वाले यजमानों पर अनुग्रह करने के लिए शीघ्रगामी रथ से हमारे सम्मुख आओ. (३) अयं यज्ञो देवया अयं मियेध इमा ब्रह्माrootययमिन्द्र सोमः. स्तीर्णं बर्हिरा तु शक्र प्र याहि पिबा निषद्य वि मुचा हरी इह.. (४) हे इंद्र! यह यज्ञ देवों को प्राप्त करने वाला है. यह यज्ञ-संबंधी पशु, ये मंत्र, यह निचोड़ा हुआ सोमरस और बिछे हुए कुश, सब तुम्हारे लिए हैं. हे शतक्रतु! तुम शीघ्र आओ और कुशों पर बैठकर सोमरस पिओ. तुम इस यज्ञ में अपने घोड़ों को रथ से अलग करो. (४) ओ सुष्टुत इन्द्र याह्यर्वाङुप ब्रह्माणि मान्यस्य कारोः. विद्याम वस्तोरवसा गृणन्तो विद्यामेषं वृजनं जीरदानुम्.. (५) हे भली प्रकार स्तुत्य इंद्र! आदरणीय स्तोता के मंत्रों को स्वीकार करके हमारे सामने आओ. स्तुति करते हुए हम तुम्हारी रक्षा पाकर निवासस्थान के साथ ही अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त करेंगे. (५) सूक्त—१७८ देवता—इंद्र यद्ध स्या त इन्द्र शृष्टिरस्ति यया बभूथ जरितृभ्य ऊती. मा नः कामं महयन्तमा धग्विश्वा ते अश्यां पर्याप आयोः.. (१) हे इंद्र! तुम्हारी वह समृद्धि सब जगह प्रसिद्ध है, जिसके द्वारा तुम स्तोताओं की रक्षा में समर्थ होते हो. हमें महान् बनाने की अपनी अभिलाषा तुम समाप्त मत करो. तुम्हारी सभी मानवोचित वस्तुओं को हम प्राप्त करें. (१) ebook converter DEMO Watermarks*