ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 472, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रातःकाल सोमरस पीते हुए हमसे मिलो. (१) युवमत्स्यस्याव नक्षथो यद्दिपत्मनो नर्यस्य प्रयज्योः. स्वसा यद्वां विश्वगूर्त्ती भराति वाजायेष्टे मधुपाविषे च.. (२) हे सबके द्वारा स्तुत्य एवं मधुपानकर्त्ता अश्विनीकुमारो! तुम्हारी बहिन उषा जिस समय तुम्हारे आने के लिए प्रभात करती है एवं यजमान अन्न और बल पाने के लिए तुम्हारी स्तुति करता है, उस समय तुम दोनों का नित्यगामी, विविध गतियों वाला, मनुष्यों का हितकारक एवं विशेष रूप से पूज्य रथ पहले ही चल देता है. (२) युवं पय उस्रियायामधत्तं पक्वमामायामव पूर्व्यं गोः. अन्तर्यद्दिनिनो वामृतप्सू ह्वारो न शुचिर्यजते हविष्मान्.. (३) हे अश्विनीकुमारो! तुमने गायों को दुधारू बनाया है. तुम गायों के थनों में पहले से पके हुए दूध को स्थापित करते हो. हे सत्यरूप! चोर वन के वृक्षों में जिस सावधानी से छिपा रहता है, उसी सावधानी से शुद्ध एवं हव्ययुक्त यजमान तुम्हारी स्तुति करता है. (३) युवं ह घर्मं मधुमन्तमत्रयेऽपो न क्षोदोऽवृणीतमेषे. तद्वां नरावश्विना पश्वइष्टी रथ्येव चक्रा प्रति यन्ति मध्वः.. (४) हे अश्विनीकुमारो! तुमने सुख के इच्छुक अत्रि मुनि के लिए गरम दूध और घी की नदियां बहा दी थीं. हे नेताओ! हम इसीलिए तुम्हारे लिए अग्नि में यज्ञ करते हैं. रथ का पहिया जिस प्रकार ढालू मार्ग पर अपने आप चलता है, उसी प्रकार सोमरस तुम्हें स्वतः प्राप्त होता है. (४) आ वां दानाय ववृतीय दस्रा गोरोहेण तौग्र्यो न जिब्रिः. अपः क्षोणी सचते माहिना वां जूर्णो वामक्षुरंहसो यजत्रा.. (५) हे शत्रुनाशक अश्विनीकुमारो! तुग्र राजा के पुत्र भुज्यु ने जिस प्रकार तुम्हें बुलाया था, उसी प्रकार मैं अपनी स्तुतियों द्वारा तुम्हें अपने यज्ञ में बुला लूंगा. तुम्हारी कृपा से ही धरती और आकाश मिले हैं. हे यज्ञ स्वामियो! यह बूढ़ा दुर्बल ऋषि पाप से छूट कर दीर्घ जीवन प्राप्त करे. (५) नि यद्युवेथे नियुतः सुदानू उप स्वधाभिः सृजथः पुरन्धिम्. प्रेषद्वेषद्वातो न सूरिरा महे ददे सुव्रतो न वाजम्.. (६) हे शोभनदानशील अश्विनीकुमारो! जब तुम अपने नियुत नाम के घोड़ों को रथ में जोड़ते हो, उस समय धरती को अन्न से पूर्ण बना देते हो. यह यजमान तुम्हें वायु के समान शीघ्र प्रसन्न करे एवं तुम्हारी कामना करे. इसके बाद यजमान उत्तम कर्म करने वाले व्यक्ति के समान अन्न प्राप्त करता है. (६) ebook converter DEMO Watermarks*