ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 487, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे यज्ञ के योग्य अग्नि! तुम यज्ञ करने वाले एवं न करने वाले दोनों को जानते हुए यज्ञकर्त्ताओं की ही कामना करो. हे आक्रमणकारी अग्नि! यज्ञ की अभिलाषा करने वाले यजमान को जिस प्रकार ऋत्विज् शिक्षा देते हैं, उसी प्रकार तुम यजमान की शिक्षा के पात्र बनो. (७) अवोचाम निवचनान्यस्मिन्मानस्य सूनुः सहसाने अग्नौ. वयं सहस्रमृषिभिः सनेम विद्यामेषं वृजनं जीरदानुम्.. (८) मंत्रों के पुत्र और शत्रुओं के नाशक अग्नि को लक्ष्य करके ये सब स्तोत्र बनाए गए हैं. हम इंद्रियों से परे रहने वाले अर्थ के प्रकाशक इन मंत्रों से हजारों प्रकार के धन के अतिरिक्त अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त करें. (८) सूक्त—१९० देवता—बृहस्पति अनर्वाणं वृषभं मन्द्रजिह्वं बृहस्पतिं वर्धया नव्यमर्कैः. गाथान्यः सुरुचो यस्य देवा आशृण्वन्ति नवमानस्य मर्ताः.. (१) हे होता! न त्यागने वाले, फलदायक, मधुरभाषी एवं स्तुति के योग्य बृहस्पति को मंत्रों द्वारा बढ़ाओ. शोभन दीप्ति एवं स्तुति किए जाते हुए बृहस्पति को गाथा नामक मंत्रों का पाठ करने वाले मनुष्य और देव स्तुतियां सुनाते हैं. (१) तमृत्विया उप वाचः सचन्ते सर्गो न यो देवयतामसर्जि. बृहस्पतिः सह्यञ्जो वरांसि विभ्वाभवत्सम्ऋते मातरिश्वा.. (२) वर्षा ऋतु संबंधी स्तुतियां जल की सृष्टि करने वाले एवं देवभक्त यजमानों को फल देने वाले बृहस्पति के समीप जाती हैं. वे आकाश रूपी व्यापी मातरिश्वा के समान सभी उत्तम फलों को उत्पन्न करके यज्ञ के निमित्त प्रकट करते हैं. (२) उपस्तुतिं नमस उद्यतिं च श्लोकं यंसत्सवितैव प्र बाहू. अस्य क्रत्वाहन्यो३ यो अस्ति मृगो न भीमो अरक्षसस्तुविष्मान्.. (३) जिस प्रकार सूर्य अपनी किरणों से प्रकाश देता है, उसी प्रकार बृहस्पति यजमानों के समीप जाकर उनकी स्तुतियां, अन्नदान एवं स्तुतिमंत्रों को स्वीकार करते हैं. विरोधहीन इन बृहस्पति की शक्ति से दिन के सूर्य, भयानक सिंह आदि के समान शक्तिशाली बनकर घूमते हैं. (३) अस्य श्लोको दिवीयते पृथिव्यामत्यो न यंसद्यक्षभृद्विचेताः. मृगाणां न हेतयो यन्ति चेमा बृहस्पतेरहिमायाँ अभि द्यून्.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*