ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 515, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे इंद्र! तुम अकेले को सुख पहुंचाने के लिए दस सौ घोड़े हो. तुम यजमान की रक्षा करते हो. तुमने दधीचि ऋषि के कल्याण के लिए बिना रस्सी वाले बंदीगृह में दस्यु का नाश किया. तुम सबके प्राप्य एवं स्तुतिपात्र हो. (९) विश्वेदनु रोधना अस्य पौंस्यं ददुरस्मै दधिरे कृत्वे धनम्. षळस्तभ्ना विष्टिरः पञ्च सन्दृशः परि परो अभवः सास्युकथ्यः.. (१०) हे इंद्र! सारी नदियां तुम्हारी शक्ति के अनुसार बहती हैं. यजमान कर्म करने वाले तुमको अन्न देते हैं एवं तुम्हारे निमित्त धन धारण करते हैं. तुमने छह विशाल स्थानों को दृढ़ बनाया है एवं तुम पंचजनों का सब प्रकार से पालन करते हो. तुम प्रशंसा के योग्य हो. (१०) सुप्रावचनं तव वीर वीर्यं१ यदेकेन क्रतुना विन्दसे वसु. जातूष्ठिरस्य प्र वयः सहस्वतो या चकर्थ सेन्द्र विश्वास्युकथ्यः.. (११) हे वीर इंद्र! तुम्हारा सामर्थ्य सबके लिए प्रशंसा के योग्य है, क्योंकि एक कर्म द्वारा ही तुम शत्रुओं का धन पा लेते हो, तुमने शक्तिशाली जातूष्ठिर को अन्न दिया था. ये सभी कार्य तुमने किए हैं, इसलिए तुम स्तुति के पात्र हो. (११) अरमयः सरपसस्तराय कं तुर्वीतये च वय्याय च सुतिम्. नीचा सन्तमुदनयः परावृजं प्रान्धं श्रोणं श्रवयन्त्सास्युकथ्यः.. (१२) हे इंद्र! तुमने बहने वाले जल के उस पार सरलता से पहुंचने के लिए तुर्वीति एवं वय्य के लिए मार्ग बनाया तथा जल में डूबे एवं तल में वर्तमान अंधे-पंगु परावृज का उद्धार करके कीर्ति प्राप्त की. तुम प्रशंसा के योग्य हो. (१२) अस्मभ्यं तद्वसो दानाय राधः समर्थयस्व बहु ते वसव्व्यम्. इन्द्र यच्चित्रं श्रवस्या अनु द्यूनोबृहद्वदेम विदथे सुवीराः.. (१३) हे निवासदाता इंद्र! हमें दानादि के लिए अपना पर्याप्त, विचित्र एवं शरण लेने योग्य धन प्रदान करो. हम प्रतिदिन उस धन को भोगने के इच्छुक हैं. हम उत्तम पुत्र एवं पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियों का पाठ करेंगे. (१३) सूक्त—१४ देवता—इंद्र अध्वर्यवो भरतेन्द्राय सोममामत्रेभिः सिञ्चता मद्यमन्धः. कामी हि वीरः सदमस्य पीतिं जुहोत वृष्णे तदिदेष वष्टि.. (१) हे अध्वर्युजनो! इंद्र के लिए सोम ले जाओ एवं चमसों के द्वारा मादक सोम को अग्नि में डालो. इस सोम को पीने के लिए वीर इंद्र सदा इच्छुक रहते हैं. तुम कामवर्धक इंद्र के निमित्त ebook converter DEMO Watermarks*