ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 521, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंकरने वाले की संग्राम में रक्षा करते हो. मैं यज्ञकाल में स्तुतियां पढ़ता हुआ तुम्हारे समीप जाता हूं. हमारे वचनों को समझो. तुझ दानशील को सोमरस से हम उसी प्रकार भिगो देंगे, जिस प्रकार तुम कुएं को जल से भर देते हो. (७) पुरा सम्बाधादभ्या ववृत्स्व नो धेनुर्न वत्सं यवसस्य पिप्युषी. सकृत्सु ते सुमतिभिः शतक्रतो सं पत्नीभिर्न वृषणो नसीमहि.. (८) हे इंद्र! घास खाकर तृप्त हुई गाय जिस प्रकार अपने बछड़े की भूख को समाप्त करती है, उसी प्रकार तुम भी शत्रुबाधा सम्मुख आने से पूर्व ही हमारी रक्षा कर लो. जिस प्रकार पत्नियां युवक को घेरती हैं, उसी प्रकार हे शतक्रतु इंद्र! हम सुंदर स्तुतियों द्वारा तुम्हें घेरेंगे. (८) नूनं सा ते प्रति वरं जरित्रे दुहीयदिन्द्र दक्षिणा मघोनी. शिक्षा स्तोतृभ्यो माति धग्भगो नो बृहद्वदेम विदथे सुवीराः.. (९) हे इंद्र! तुम्हारी जो धनयुक्त दक्षिणा स्तुतिकर्त्ता की अभिलाषा पूर्ण करती है, वह हमें प्राप्त हो. हे भजनीय इंद्र! हम स्तोताओं को छोड़कर उसे अन्य किसी को मत देना. हम उत्तम पुत्र, पौत्रादि प्राप्त करके इस यज्ञ में तुम्हारी बहुत स्तुति करेंगे. (९) सूक्त—१७ देवता—इंद्र तदस्मै नव्यमङ्गिरस्वदर्चत शुष्मा यदस्य प्रत्नथोदीरते. विश्वा यदगोत्रा सहसा परीवृता मदे सोमस्य दृंहितान्यैरयत्.. (१) हे स्तोताओ! इंद्र का शत्रुनाशक तेज प्राचीनकाल के समान उदित होता है, इसलिए तुम अत्यंत नवीन स्तुतियों द्वारा अंगिराओं के समान इंद्र की पूजा करो. इंद्र ने सोमरस के मद में वृत्र असुर द्वारा रोके हुए मेघों को स्वतंत्र कर दिया था. (१) स भूतु यो ह प्रथमाय धायस ओजो मिमानो महिमानमातिरत्. शूरो यो युत्सु तन्वं परिव्यत शीर्षणि द्यां महिना प्रत्यमुञ्चत.. (२) उन इंद्र की वृद्धि हो, जिन्होंने अपने बल का प्रदर्शन करते हुए सबसे पहले सोमरस पीने के लिए अपनी महिमा बढ़ाई थी, युद्धकाल में शत्रुहंता बनकर अपने शरीर की रक्षा की थी एवं अपनी महिमा के कारण आकाश को शीश पर धारण किया था. (२) अधाकृणोः प्रथमं वीर्यं महद्यदस्याग्रे ब्रह्मणा शुष्ममैरयः. रथेष्ठेन हर्यश्वेन विच्युताः प्र जीरयः सिस्रते सध्य१क् पृथक्.. (३) हे इंद्र! तुमने स्तुतियों द्वारा प्रसन्न होकर अपना शत्रुनाशक बल उत्पन्न किया है. इस ebook converter DEMO Watermarks*