ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 523, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंबनाओ. (८) नूनं सा ते प्रति वरं जरित्रे दुहीयदिन्द्र दक्षिणा मघोनी. शिक्षा स्तोतृभ्यो माति धग्भगो नो बृहद्वदेम विदथे सुवीरा:.. (९) हे इंद्र! जो धनसंपन्न दक्षिणा स्तुतिकर्त्ता की अभिलाषा पूर्ण करती है, वह हमें प्रदान करो. हे भजनीय इंद्र! हम स्तोताओं को छोड़कर उसे अन्य किसी को मत देना. हम उत्तम पुत्र-पौत्रादि प्राप्त करके इस यज्ञ में तुम्हारी बहुत स्तुति करेंगे. (९) सूक्त—१८ देवता—इंद्र प्राता रथो नवो योजि सस्निश्चतुर्युगस्त्रिकशः सप्तरश्मिः. दशारित्रो मनुष्यः स्वर्षाः स इष्टिभिर्मतिभी रंह्यो भूत्.. (१) स्तुतियुक्त एवं शुद्ध यज्ञ हम लोगों ने प्रातःकाल आरंभ किया है. चार पत्थरों, तीन स्वरों, सात छंदों तथा दस पात्रों वाला यह यज्ञ मानवों का हितकारक एवं स्वर्ग देने वाला है. वह मनोहर स्तुतियों एवं हवनों द्वारा प्रसिद्ध होगा. (१) सास्मा अरं प्रथमं स द्वितीयमुतो तृतीयं मनुषः स होता. अन्यस्या गर्भमन्य ऊ जनन्त सो अन्येभिः सचते जेन्यो वृषा.. (२) मानवों के लिए उत्तम फल देने वाला यज्ञ इंद्र के लिए, प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय सवन में पूरा हुआ है. ऋत्विजों ने यज्ञ को धरती के गर्भ के रूप में उत्पन्न किया है. कामवर्षक एवं विजयदाता यज्ञ देवों के साथ मिल जाता है. (२) हरी नु कं रथ इन्द्रस्य योजमायै सूक्तेन वचसा नवेन. मो षु त्वामत्र बहवो हि विप्रा नि रीरमन्यजमानासो अन्ये.. (३) नवीन स्तुति रूपी वचनों के साथ इंद्र के रथ में हरि नामक अश्वों को इसलिए जोड़ा गया है कि इंद्र शीघ्र आ सकें. इस यज्ञ में बहुत से बुद्धिमान् स्तोता हैं. हे इंद्र! दूसरे यजमान तुम्हें अधिक प्रसन्न नहीं कर सकेंगे. (३) आ द्वाभ्यां हरिभ्यामिन्द्र याह्या चतुर्भिा षड्भिर्हूयमानः. आष्टाभिर्दशभिः सोमपेयमयं सुतः सुमख मा मृधस्कः.. (४) हे इंद्र! होताओं द्वारा बुलाए जाने पर तुम दो, चार, छह, आठ या दस हरि नामक अश्वों द्वारा सोमरस पीने के लिए आओ. हे शोभन धनशाली इंद्र! यह सोम तुम्हारे निमित्त प्रस्तुत है, इसे नष्ट मत करना. (४) आ विंशत्या त्रिंशता याह्यर्वाङा चत्वारिंशता हरिभिर्युजानः. ebook converter DEMO Watermarks*