भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 524, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 524

आ पञ्चाशता सुरथेभिरिन्द्रा षष्ट्या सप्तत्या सोमपेयम्.. (५) हे इंद्र! सोमपान के लिए उत्तम गति वाले बीस, तीस, चालीस, पचास, साठ अथवा सत्तर घोड़ों द्वारा हमारे सामने आओ. (५) अशीत्या नवत्या याह्यर्वाङा शतेन हरिभिरुह्यमान:. अयं हि ते शुनहोत्रेषु सोम इन्द्र त्वाया परिषिक्तो मदाय.. (६) हे इंद्र! अस्सी, नब्बे एवं सौ हरि नामक अश्वों द्वारा चलकर हमारे सामने आओ. शुनहोत्र नामक पात्रों में तुम्हारे आनंद के लिए सोम रखा हुआ है. (६) मम ब्रह्मेन्द्र याह्यच्छा विश्वा हरी धुरि धिष्वा रथस्य. पुरुत्रा हि विहव्यो बभूथास्मिञ्छूर सवने मादयस्व.. (७) हे इंद्र! मेरी स्तुति को लक्षित करके आओ एवं अपने विश्वव्यापी हरि नामक घोड़ों को रथ के आगे जोड़ो. हे शूर! तुम्हें बहुत से यजमान बुलाते हैं. तुम इस यज्ञ में आकर प्रसन्न बनो. (७) न म इन्द्रेण सख्यं वि योषदस्मभ्यमस्य दक्षिणा दुहीत. उप ज्येष्ठे वरूथे गभस्तौ प्रायेप्राये जिगीवांसः स्याम.. (८) इंद्र से मेरी मित्रता कभी न टूटे. इंद्र की दक्षिणा मुझे मनचाहा फल दे. हम इंद्र के विपत्तिनाशक उत्तम बाहुओं के समीप स्थित हैं. हम प्रत्येक युद्ध में विजय पावें. (८) नूनं सा ते प्रति वरं जरित्रे दुहीयदिन्द्र दक्षिणा मघोनी. शिक्षा स्तोतृभ्यो माति धग्भगो नो बृहद्वदेम विदथे सुवीराः.. (९) हे इंद्र! तुम्हारी जो धनयुक्त दक्षिणा स्तुतिकर्त्ता की अभिलाषा पूर्ण करती है, वह हमें प्राप्त हो. हे सेवनीय इंद्र! हम स्तोताओं को छोड़कर वह दक्षिणा अन्य किसी को मत देना. हम उत्तम पुत्र-पौत्रादि प्राप्त करके इस यज्ञ में तुम्हारी बहुत स्तुति करेंगे. (९) सूक्त—१९ देवता—इंद्र अपाय्यस्यान्धसो मदाय मनीषिणः सुवानस्य प्रयसः. यस्मिन्निन्द्रः प्रदिवि वावृधान ओको दधे ब्रह्मण्यन्तश्च नरः.. (१) इंद्र अपने आनंद के लिए सोमरस निचोड़ने वाले मेधावी यजमान का अन्न भक्षण करें. इस सोमरूपी प्राचीन अन्न में इंद्र बढ़ते हुए निवास करते हैं. इंद्र की स्तुति के इच्छुक ऋत्विज् भी इसी में निवास करते हैं. (१) ebook converter DEMO Watermarks*

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