भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 525

अस्य मन्दानो मध्वो वज्रहस्तोऽहिमिन्द्रो अर्णोवृतं वि वृश्चत्. प्र यद्द्वयो न स्वसराण्यच्छा प्रयांसि च नदीनां चक्रमन्त.. (२) इस मदकारक सोमरस के नशे में मग्न होकर इंद्र ने अपने हाथों में वज्र उठाया एवं जल को रोकने वाले अहि नामक असुर को छिन्नभिन्न कर दिया. उस समय जलराशि सागर की ओर इस प्रकार तेजी से जा रही थी, जिस प्रकार प्यासे पक्षी तालाब की ओर जाते हैं. (२) स माहिन इन्द्रो अर्णो अपां प्रैरयदहिहाच्छा समुद्रम्. अजनयत्सूर्यं विदद्गा अक्तुनाह्नां वयुनानि साधत्.. (३) उन पूजनीय एवं अहिनाशक इंद्र ने जल प्रवाह को सागर की ओर प्रेरित किया. उन्होंने सूर्य को उत्पन्न करके गायों को खोजा तथा अपने तेज से दिवसों को प्रकाशित बनाया. (३) सो अप्रतीनि मनवे पुरूणीन्द्रो दाशद्दाशुषे हन्ति वृत्रम्. सद्यो यो नृभ्यो अतसाय्यो भूतस्पृधानेभ्यः सूर्यस्य सातौ.. (४) इंद्र ने हव्य देने वाले यजमान को असंख्य उत्तम धन दिया तथा वृत्र नामक असुर को मार डाला. सूर्य को प्राप्त करने के लिए जब स्तोताओं में परस्पर स्पर्धा हुई तो इंद्र ने उसका कारण बनकर सबको सहारा दिया. (४) स सुन्वत इन्द्रः सूर्यमा देवो रिणङ्मर्त्याय स्तवान्. आ यद्द्रियं गुहदवद्यमस्मै भरदंशं नैतशो दशस्यन्.. (५) स्तुति करने पर इंद्र ने सोम निचोड़ने वाले एतश नामक व्यक्ति के लिए सूर्य को प्रकाशित किया था. जिस प्रकार पिता अपना भाग पुत्र को देता है, उसी प्रकार एतश ने इंद्र को गुप्त एवं अमूल्य सोमरूपी धन दिया था. (५) स रन्धयत्सदिवाः सारथये शुष्णमशुषं कुयवं कुत्साय. दिवोदासाय नवतिं च नवेन्द्रः पुरो व्यैरञ्छम्बरस्य.. (६) तेजस्वी इंद्र ने अपने सारथि कुत्स के कल्याण के लिए शुष्ण, अशुष और कुयव को वश में किया था तथा दिवोदास का पक्ष लेकर शंबर असुर के निन्यानवे नगरों को तोड़ा था. (६) एवा त इन्द्रोचथमहेम श्रवस्या न त्मना वाजयन्तः. अश्याम तत्साप्तमाशुषाणा ननमो वधरदेवस्य पीयोः.. (७) हे इंद्र! हम तुम्हें शक्तिशाली बनाकर अन्नप्राप्ति की इच्छा से तुम्हारी स्तुति करते हैं. हम तुम्हें प्राप्त करके तुम्हारी मित्रता पावें. तुम देव-विरोधी पीयु असुर के नाश के लिए वज्र चलाओ. (७) eBook converter DEMO Watermarks*