भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 616, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 616

वीळौ सतीरभि धीरा अतृन्दन्प्राचाहिन्वन्मनसा सप्त विप्राः. विश्वामविन्दन्पथ्यामृतस्य प्रजानन्चित्ता नमसा विवेश.. (५) धीर एवं मेधावी सात अंगिरागोत्रीय ऋषियों ने पर्वत में बंद गायों का पता लगा लिया था. पर्वत पर गायों को जानकर वे जिस मार्ग से घुसे थे, उसी से गायों को निकाल लाए. उन्होंने यज्ञ की साधनरूप सब गायों को प्राप्त किया. इंद्र ने अंगिरागोत्रीय ऋषियों का कर्म जानकर उन्हें नमस्कार द्वारा आदर दिया एवं उस पर्वत में घुस गए. (५) विदद्यदी सरमा रुग्णद्रेर्महि पाथः पूर्व्यं सध्यक्कः. अग्रं नयत्सुपद्यक्षराणामच्छा रवं प्रथमा जानती गात्.. (६) सरमा नाम की देवशुनी ने जब पर्वत का टूटा हुआ द्वार प्राप्त किया, तब इंद्र ने अपने वचन के अनुसार उसे बहुत से भोज्य पदार्थों के साथ अन्न दिया. सुंदर पैरों वाली सरमा (देवशुनी) गायों के रंभाने का शब्द पहचान कर उनके सामने पहुंच गई. (६) अगच्छदु विप्रतमः सखीयन्नसूदयत्सुकृते गर्भमद्रिः. ससान मर्यो युवाभिर्मखस्यन्नथाभवदङ्गिरा सद्यो अर्चन्.. (७) अतिशय मेधावी इंद्र अंगिरागोत्रीय ऋषियों के साथ मित्रता की इच्छा से गए थे. उत्तम योद्धा इंद्र के लिए पर्वत ने अपने भीतर बंद गायों को बाहर निकाल दिया. नित्यतरुण मरुतों के साथ असुरमारक एवं अंगिराओं की गायों की कामना करने वाले इंद्र ने उन्हें प्राप्त किया. अंगिरा ऋषि ने तुरंत इंद्र की पूजा की. (७) सतः सतः प्रतिमानं पुरोभूर्विश्वा वेद जनिमा हन्ति शुष्णम्. प्र णो दिवः पदवीर्र्व्युरर्चन्सखा सखीँरमुञ्चन्निरावद्यात्.. (८) उत्तम वस्तुओं के प्रतिनिधि एवं युद्ध में आगे रहने वाले इंद्र समस्त उत्तम पदार्थों को जानते हैं, उन्होंने शुष्ण असुर का वध किया है. परम मेधावी एवं गायों के इच्छुक हमारे मित्र इंद्र स्वर्ग से आकर हमें पापों से बचावें. (८) नि गव्यता मनसा सेदुरर्कैः कृण्वानासो अमृतत्वाय गातुम्. इदं चिन्नु सदनं भूर्येषां येन मासाँ असिषासन्नृतेन.. (९) अंगिरागोत्रीय ऋषि गायों की इच्छा करते हुए स्तोत्रों द्वारा अमरता पाने का उपाय करते हुए यज्ञ में बैठे थे. वे अपने यज्ञ के द्वारा महीनों को अलग करना चाहते थे. इसलिए उनके यज्ञ में बहुत से आसन थे. (९) सम्पश्यमाना अमदन्नभि स्वं पयः प्रत्नस्य रेतसो दुघानाः. वि रोदसी अतपद्घोष एषां जाते निःष्ठामदधुर्गोषु वीरान्.. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*