ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 618, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअपश्चिद्वेष विभवो३ दमूनाः प्र सध्रीचीरसृजद्विश्वश्चन्द्राः. मध्वः पुनानाः कविभिः पवित्रैर्द्युभिर्हिन्वन्त्यक्तभिर्धुन्त्रीः.. (१६) शांतचित्त इंद्र ने सर्वत्र व्याप्त, एक-दूसरे से मिले हुए एवं संसार को प्रसन्न करने वाले जलों को उत्पन्न किया. वे जल मधुरतायुक्त सोम को अग्नि, वायु व सूर्य के द्वारा शुद्ध कराते हुए सारे संसार को प्रसन्न करके रात-दिन अपने-अपने कामों में लगाते हैं. (१६) अनु कृष्णे वसुधिती जिहाते उभे सूर्यस्य मंहना यजत्रे. परि यत्ते महिमानं वृजध्यै सखाय इन्द्र काम्या ऋजिप्याः.. (१७) हे इंद्र! तुझ जगत्प्रेरक की महिमा से समस्त पदार्थों को धारण करने वाले एवं यज्ञ के पात्र दिनरात बार-बार आते हैं. सीधी चाल वाले, मित्र एवं कमनीय मरुद्गण विघ्नकारी शत्रुओं को हराने के लिए तुम्हारी शक्ति का सहारा पाकर समर्थ बनते हैं. (१७) पतिर्भव वृत्रहन्त्सनूतानां गिरां विश्वायुर्वृषभो वयोधाः. आ नो गहि सख्येभिः शिवेभिर्महान्महीभिरूतिभिः सरण्यन्.. (१८) हे वृत्रहंता, पूर्ण आयु वाले, कामवर्षक व अन्नदाता इंद्र! तुम हमारी अतिशय प्रिय स्तुतियों के स्वामी बनो. महान् एवं रूप के निमित्त जाने के इच्छुक तुम महती रक्षाओं एवं कल्याणकारी मित्रता के लिए हमारे सामने आओ. (१८) तमङ्गिरस्वन्नमसा सपर्यन्रव्यं कृणोमि सन्यसे पुराजाम्. द्रुहो वि याहि बहुला अदेवीः स्वश्च नो मघवन्त्सातये धाः.. (१९) हे इंद्र! मैं अंगिरागोत्रीय ऋषियों के समान तुझ पुरातन की पूजा करता हुआ स्तुतियों द्वारा तुम्हें नवीन बनाता हूं. तुम देवविरोधी बहुत से शत्रु राक्षसों को मार डालो. हे मघवन्! हमें उपभोग के लिए धन दो. (१९) मिहः पावकाः प्रतता अभूवन्त्स्वस्ति नः पिपृहि पारमासाम्. इन्द्र त्वं पाहि नो रिषो मक्षमक्षू कृणु हि गोजितो नः.. (२०) हे इंद्र! पाप नष्ट करने वाले जल चारों ओर फैले हैं. इन जलों के अविनाशी नद को हमारे लिए जल से भर दो. हे इंद्र! तुम रथ के स्वामी हो. हमें शत्रु से बचाओ एवं अत्यंत शीघ्र गायों का जीतने वाला बनाओ. (२०) अदेदिष्ट वृत्रहा गोपतिर्गा अन्तः कृष्णाँ अरुषैर्धामभिर्गात्. प्र सूनृता दिशमान ऋतेन दुरश्च विश्वा अवृणोदप स्वाः.. (२१) वे वृत्रनाशक एवं गोस्वामी इंद्र हमें गाएं दें एवं यज्ञविनाशक काले लोगों को अपने दीप्त तेज द्वारा समाप्त करें. इंद्र ने सत्यवचन से अंगिराओं को प्यारी गाएं देकर गायों के निकलने ebook converter DEMO Watermarks*