ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 619, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंके सभी द्वार बंद कर दिए थे. (२१) शुनं हुवेम मघवानमिन्द्रमस्मिन्भरे नृतमं वाजसातौ. शृण्वन्तमुग्रमूतये समत्सु घ्नन्तं वृत्राणि संज्जितं धनानाम्.. (२२) धन-प्राप्ति वाले संग्राम में उत्साहपूर्ण, धनवान् सकल-विश्व के नेता, स्तुतियां सुनने वाले, शत्रुओं को भयंकर, युद्धों में राक्षस विनाशकारी एवं शत्रुओं के धन के विजेता इंद्र को हम रक्षा के लिए बुलाते हैं. (२२) सूक्त—३२ देवता—इंद्र इन्द्र सोमं सोमपते पिबेमं माध्यन्दिनं सवनं चारु यत्ते. प्रपुथ्या शिप्रे मघवन्नृजीषिन्विमुच्या हरी इह मादयस्व.. (१) हे सोम के अधिपति इंद्र! माध्यंदिन-सवन में तैयार किए गए इस सोम को पिओ. यह रमणीय है. हे मघवन् एवं ऋजीषी इंद्र! रथ में जोड़े गए दोनों घोड़ों को खोलकर उनके जबड़ों को यहां की घासों से भरो एवं उस यज्ञ में उन्हें प्रसन्न करो. (१) गवाशिरं मन्थिनमिन्द्र शुक्रं पिबा सोमं ररिमा ते मदाय. ब्रह्मकृता मारुतेना गणेन सजोष रुदैस्तृपदा वृषस्व.. (२) हे इंद्र! गाय के दूध से मिश्रित, मथे हुए एवं नवीन सोम को पिओ. यह सोम हम तुम्हारे हर्ष के लिए दान करते हैं. स्तुति करने वाले मरुतों एवं रुद्रों के साथ यह सोम तृप्ति पर्यंत पान करो. (२) ये ते शुष्मं ये तविषीमवर्धन्नर्चन्त इन्द्र मरुतस्त ओजः. माध्यन्दिने सवने वज्रहस्त पिबा रुद्रेभिः सगणः सुशिप्र.. (३) हे इंद्र! जो मरुत् तुम्हारे तेज एवं बल को बढ़ाते हैं, वे ही तुम्हारी स्तुति करते हुए तुम्हारा ओज बढ़ाते हैं. हे वज्रहस्त एवं सुंदर ठोढ़ी वाले इंद्र! तुम रुद्रों के साथ मिलकर माध्यंदिन सवन में सोम पिओ. (३) त इन्न्वस्य मधुमद्विप्र इन्द्रस्य शर्धो मरुतो य आसन्. येभिर्वृत्रस्येषितो विवेदामर्मणो मन्यमानस्य मर्म.. (४) जो मरुत् इंद्र के बलरूप थे, उन्हीं ने मधुर वाक्य बोलकर इंद्र को प्रेरित किया था. मेरा मर्म कोई नहीं जानता है, ऐसा समझने वाले वृत्र का रहस्य मरुतों ने इंद्र को बताया. (४) मनुष्वदिन्द्र सवनं जुषाणः पिबा सोमं शश्वते वीर्याय. स आ ववृत्स्व हर्यश्व यज्ञैः सरण्युभिरपो अर्णो सिसर्षि.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*