ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 620, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे इंद्र! मनु के यज्ञ के समान तुम शत्रुओं को हराने वाली शक्ति पाने के लिए मेरे इस यज्ञ का सेवन करते हुए सोम पिओ. हे हरि नामक अश्वों वाले इंद्र! तुम यज्ञ के योग्य मरुतों के साथ आओ एवं गमनशील मरुतों के साथ आकाश के जल को धरती पर लाओ. (५) त्वमपो यद्ध वृत्रं जघन्वाँ अत्याँइव प्रासृजः सर्तवाजौ. शयानमिन्द्र चरता वधेन वव्रिवांसं परि देवीरदेवम्.. (६) हे इंद्र! तुमने दीप्तिशाली जल को चारों ओर से रोककर वर्तमान दीप्तिशून्य एवं सोए हुए वृत्र को युद्ध के द्वारा मारा था एवं युद्ध में जलों को अश्व के समान तेजी से बहने के लिए छोड़ दिया था. (६) यजाम इन्नमसा वृद्धमिन्द्रं बृहन्तमृष्वमजरं युवानम्. यस्य प्रिये ममतुर्यज्ञियस्य न रोदसी महिमानं ममाते.. (७) हम हव्य अन्न से वृद्धि प्राप्त, महान् जरारहित, नित्य तरुण एवं स्तुतिपात्र इंद्र की पूजा करते हैं. अपरिमित धरती और आकाश यज्ञ के योग्य इंद्र की महिमा को सीमित नहीं कर सकते. (७) इन्द्रस्य कर्म सुकृता पुरूणि व्रतानि देवा न मिनन्ति विश्वे. दाधार यः पृथिवीं द्यामुतेमां जजान सूर्यमुषसं सुदंसाः.. (८) समस्त देव इंद्र द्वारा निर्मित धरती आदि तथा यज्ञादि का विरोध नहीं कर सकते. इंद्र ने धरती, आकाश एवं अंतरक्षि से लोक को धारण किया था. शोभनकर्मा इंद्र ने सूर्य तथा उषा को उत्पन्न किया था. (८) अद्रोग्ध सत्यं तव तन्महित्वं सद्यो यज्जातो अपिबो ह सोमम्. न द्याव इन्द्र तवसस्त ओजो नाहा न मासाः शरदो वरन्त.. (९) हे द्रोहरहित इंद्र! तुम्हारी महिमा वास्तविक है, क्योंकि तुमने उत्पन्न होते ही सोमपान किया था, तुझ बलवान् के तेज का वारण स्वर्ग, दिन, मास एवं वर्ष भी नहीं कर सकते. (९) त्वं सद्यो अपिबो जात इन्द्र मदाय सोमं परमे व्योमन्. यद्ध द्यावापृथिवी आविवेशीरथाभवः पूर्व्यः कारुधायाः.. (१०) हे इंद्र! तुमने जन्म लेने के पश्चात् उत्तम स्थान में स्थित होकर आनंद के लिए सोम पिया था. जब तुम धरती और आकाश में प्रविष्ट हुए थे, उसी समय पुरातन बनकर कर्मों के विधाता बने थे. (१०) अहन्नहिं परिशयानमर्ण ओजायमानं तुविजात तव्यान्. न ते महित्वमनु भूदध द्यौर्यदन्यया स्फिग्या३ क्षामवस्थाः.. (११) ebook converter DEMO Watermarks*