भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 653, कुल 1855 में से

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हे इंद्र! हमारे शरीरों में बल दो एवं हमारे बैलों को बलवान् करो. हे बल देने वाले इंद्र! हमारे पुत्र एवं पौत्रों को चिरजीवी होने के लिए बल दो. (१८) अभि व्ययस्व खदिरस्य सारमोजो धेहि स्पन्दने शिंशपायाम्. अक्ष वीळो वीळित वीळयस्व मा यामादस्मादव जीहिपो नः.. (१९) हे इंद्र! हमारे रथ के सार रूप खदिर तथा शीशम के काठ को दृढ़ करो. हे जुए! हमने तुम्हें दृढ़ बनाया है. तुम दृढ़ बनो. इस चलते हुए रथ से हमें गिरा नहीं देना. (१९) अयमस्मान्वनस्पतिर्मा च हा मा च रीरिषत्. स्वस्त्या गृहेभ्य आवसा आ विमोचनात्.. (२०) वनस्पतियों से बना हुआ यह रथ हमें न छोड़े और न विनष्ट करे. हम लोग जब तक घर न पहुंचें, जब तक हमारा रथ चले और जब तक हम रथ से घोड़े अलग न कर दें, तब तक हमारा कल्याण हो. (२०) इन्द्रोतिभिर्बहुलाभिनों अद्य याच्छ्रेष्ठाभिर्मघवञ्छूर जिन्व. यो नो द्वेष्ट्यधरः सस्पदीष्ट यमु द्विष्मस्तमु प्राणो जहातु.. (२१) हे शूर एवं धनस्वामी इंद्र! हम शत्रुविनाशकारियों को श्रेष्ठ एवं विविध रक्षा उपायों द्वारा प्रसन्न करो. जो हमसे द्वेष करे, वे नीचे गिरे तथा हम जिससे द्वेष करें उसे आप त्याग दें. (२१) परशुं चिद्धि तपति शिम्बलं चिद्धि वृश्चति. उखा चिदिन्द्र येषन्ती प्रयस्ता फेनमस्यति.. (२२) हे इंद्र! हमारे शत्रु कुल्हाड़ी को देखकर वृक्ष के समान संतप्त हों, सेमल के फूल के समान अनायास ही उनके अंग गिर पड़ें एवं हमारे मंत्रबल से वे भोजन पकाने वाली हांडी के समान मुंह से फेन गिरावें. (२२) न सायकस्य चिकिते जनासो लोधं नयन्ति पशु मन्यमानाः. नावाजिनं वाजिना हासयन्ति न गर्दभं पुरो अश्वान्नयन्ति.. (२३) हे मनुष्यो! तुम विश्वामित्र के मंत्रों की शक्ति नहीं जानते हो. तपस्या नष्ट होने के लोभ से चुप बैठे हुए मुझे तुम पशु के समान बांधकर ले जा रहे हो. सर्वज्ञ मूर्ख की हंसी नहीं उड़ाता और न गधे को घोड़े के सामने लाया जाता है. (२३) इम इन्द्र भरतस्य पुत्रा अपपित्वं चिकितुर्न प्रपित्वम्. हिन्वन्त्यश्वमरणं न नित्यं ज्यावाजं परि णयन्त्याजौ.. (२४) ebook converter DEMO Watermarks*