ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 654, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे इंद्र! भरतवंशी-क्षत्रिय वशिष्ठ दूर होना जानते हैं, मिलना नहीं जानते. वे संग्राम में वशिष्ठगोत्रीय जनों के प्रति सच्चे शत्रु के समान घोड़े दौड़ाते हैं एवं धनुष उठाते हैं. (२४) सूक्त—५४ देवता—विश्वेदेव इमं महे विदथ्याय शूषं शश्वत्कृत्व ईड्याय प्र जभुः. शृणोतु नो दम्येभिरनीकैः शृणोत्वग्निर्दिव्यैरजस्रः.. (१) सब लोग महान् यज्ञ में मंथन द्वारा उत्पन्न एवं सबके द्वारा स्तुति योग्य अग्नि को लक्ष्य करके यह सुखकर स्तोत्र बार-बार बोलते हैं. अग्नि शत्रुओं का दमन करने में कुशल, तेज से युक्त एवं दिव्यतेज से निरंतर मिलित होकर हमारे इस स्तोत्र को सुने. (१) महि महे दिवे अर्चा पृथिव्यै कामो म इच्छञ्चरति प्रजानन्. ययोर्ह स्तोमे विदथेषु देवाः सपर्यवो मादयन्ते सचायोः.. (२) हे स्तोता! तुम महान् आकाश एवं महती पृथ्वी के महत्त्व को जानते हुए उनकी स्तुति करो. मेरा मनोरथ सभी भोगों की अभिलाषा करता है. मानवों के यज्ञों में धरती-आकाश की सेवा के इच्छुक देवगण मिलकर स्तुति करने में प्रसन्न होते हैं. (२) युवोर्ऋतं रोदसी सत्यमस्तु महे षु णः सुविताय प्र भूतम्. इदं दिवे नमो अग्ने पृथिव्यै सपर्यामि प्रयसा यामि रत्नम्.. (३) हे धरती-आकाश! तुम्हारी स्तुति वास्तविक बने. तुम हमारे यज्ञों की समाप्ति एवं हमें महान् अभ्युदय देने में समर्थ बनो. हे अग्नि! धरती एवं आकाश को नमस्कार है. मैं हवि से उनकी सेवा करता हूं एवं उनसे धन मांगता हूं. (३) उतो हि वां पूर्व्या आविविद्र ऋतावरी सत्यवाचः. नरश्चिद्वां समिथे शूरसातौ ववन्दिरे पृथिवि वेविदानाः.. (४) हे सत्यधारक धरती और आकाश! पुरातन सत्यवादी ऋषियों ने तुमसे वांछित वस्तुएं प्राप्त की थीं. हे पृथ्वी! युद्ध में जाने वाले लोग भी तुम्हारा महत्त्व जानते हुए तुम्हारी वंदना करते हैं. (४) को अद्धा वेद क इह प्र वोचद्देवाँ अच्छा पथ्या३का समेति. ददृश्र एषामवमा सदांसि परेषु या गुह्येषु व्रतेषु.. (५) उस सत्य बात को कौन जानता है? उसे कौन करता है? देवों के सामने कौन सा मार्ग भली-भांति जाता है? स्वर्ग में स्थित देवस्थानों से नीचे जो स्थान दिखाई देते हैं एवं जो उत्तम तथा कष्टसाध्य व्रतों द्वारा प्राप्त होते हैं, उन स्थानों को कौन सा मार्ग जाता है? (५) ebook converter DEMO Watermarks*