भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 670, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 670

मही मित्रस्य वरुणस्य माया चन्द्रेव भानुं वि दधे पुरुत्रा.. (७) जल बरसाने वाले सूर्य सत्यरूप दिन के आरंभ में उषा को प्रेरित करते हुए विशाल धरती-आकाश के बीच में प्रवेश करते हैं. महती उषा मित्र एवं वरुण की प्रभा बनकर इस प्रकार अपना प्रकाश सब जगह फैलाती है, जैसे सोना अपनी चमक फैलाता है. (७) सूक्त—६२ देवता—इंद्र, वरुण आदि इमा उ वां भृमयो मन्यमाना युवावते न तुज्या अभूवन्. क्व१ त्यादिन्द्रावरुणा यशो वां येन स्मा सिनं भरथः सखिभ्यः.. (१) हे इंद्र व वरुण! शत्रुओं द्वारा सताई हुई एवं घूमती हुई तुम्हारी प्रजाएं बलवान् शत्रुओं द्वारा नष्ट न हो जावें. तुम्हारा वह यश कहां है, जिससे तुम हम मित्रों को अन्न देते हो? (१) अयुम वां पुरतमो रयीयञ्छश्वत्तममवसे जोहवीति. सजोष़ाविन्द्रावरुणा मरुद्भिर्दिवा पृथिव्या शृणुतं हवं मे.. (२) हे इंद्र व वरुण! धन का इच्छुक एवं महान् यजमान अपनी रक्षा के लिए तुम दोनों को सदा बुलाता है. तुम दोनों मरुतों, द्युलोक एवं धरती के साथ मिलकर मेरी स्तुति सुनो. (२) अस्मे तदिन्द्रावरुणा वसु ष्यादस्मे रयिर्मरुतः सर्ववीरः. अस्मान्वरूत्रीः शरणैरवन्त्वस्मान्होत्रा भारती दक्षिणाभिः.. (३) हे इंद्र व वरुण! हमारे पास मनचाहा उत्तम धन हो. हे मरुतो! हमारे पास सब काम में कुशल एवं वीर पुत्र हों एवं देवपत्नियां वर देकर हमारी रक्षा करें. अग्निपत्नी होत्रा एवं सूर्यपत्नी भारती दक्षिणा के रूप में गाएं देकर हमारी रक्षा करें. (३) बृहस्पते जुषस्व नो हव्यानि विश्वदेव्य. रास्व रत्नानि दाशुषे.. (४) हे सब देवों के हितकारी बृहस्पति! इन लोगों के हव्य का सेवन करो एवं यजमान को उत्तम धन दो. (४) शुचिमर्कैर्बृहस्पतिमध्वरेषु नमस्यत. अनाम्योज आ चके.. (५) हे ऋत्विजो! तुम यज्ञ में स्तुतियों द्वारा पवित्र बृहस्पति की सेवा करो. मैं उनसे वह बल मांगता हूं, जिसे शत्रु न हरा सकें. (५) वृषभं चर्षणीनां विश्वरूपमदाभ्यम्. बृहस्पतिं वरेण्यम्.. (६) कामवर्षी, विश्वरूप नामक बैल की सवारी वाले, तिरस्कार न करने योग्य एवं सबके ebook converter DEMO Watermarks*