ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 672, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसोमदेव हमारी आयु बढ़ाते हुए एवं यज्ञ में विघ्न डालने वाले शत्रुओं को हराते हुए हमारे यज्ञ में बैठें. (१५) आ नो मित्रावरुणा घृतैर्गव्यूतिमुक्षतम्. मध्वा रजांसि सुक्रतू.. (१६) हे शोभन कर्म वाले मित्र व वरुण! हमारी गोशाला को दूध से सींच दो एवं हमारे घरों को मधुर रस से भर दो. (१६) उरुशंसा नमोवृधा मह्ना दक्षस्य राजथ:. द्राघिष्ठाभि: शुचिव्रता.. (१७) हे पवित्र कर्म वाले मित्र व वरुण! तुम बहुतों द्वारा स्तुत एवं हव्य अन्न से वृद्धि को प्राप्त हो. तुम विशाल स्तुतियों द्वारा धन का महत्त्व पाकर सुशोभित बनो. (१७) गृणाना जमदग्निना योनावृतस्य सीदतम्. पातं सोममृतावृधा.. (१८) हे मित्र व वरुण! तुम जमदग्नि ऋषि द्वारा स्तुत होकर यज्ञ में बैठो. यज्ञकर्म का फल बढ़ाने वाले तुम दोनों सोम पिओ. (१८) ebook converter DEMO Watermarks*