भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 680, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 680

धौंकनी के द्वारा लोहे को साफ करता है. अग्नि को दीप्तिशाली करते एवं इंद्र को बढ़ाते हुए उन लोगों ने यज्ञ के चारों ओर बैठकर महान् गोधन को प्राप्त किया था. (१७) आ यूथेव क्षुमति पश्वो अख्यद्देवानां यज्जन्निमान्त्युग्र. मर्तानां चिदुर्वशीरकृप्रन्वृधे चिदर्य उपरस्यायोः.. (१८) हे तेजस्वी अग्नि! अंगिराओं के पर्वत में बंद गोसमूह को इंद्र ने उसी प्रकार देखा, जिस प्रकार लोग अन्न वाले घर में पशुसमूह को देखते हैं. अंगिराओं द्वारा लाई गईं गायों से प्रजाएं संपन्न बनी थीं. स्वामी संतान के पालन एवं दास अपने पालन में समर्थ हुए थे. (१८) अकर्म ते स्वपसो अभूम ऋतमवस्त्रनुषसो विभातिः. अनूनमग्निं पुरुधा सुश्चन्द्रं देवस्य मर्मृजतश्चारु चक्षुः.. (१९) हे अग्नि! हम तुम्हारी सेवा करते हुए शोभन कर्मों वाले बनें. प्रकाश वाली उषाएं सबको तेज से ढक देती हैं तथा प्रसन्नताकारक अग्नि को अनेक बार पूर्ण रूप से धारण करती हैं. हे तेजस्वी अग्नि! हम तुम्हारे मनोहर तेज की सेवा करके शोभनकर्मयुक्त बनें. (१९) एता ते अग्न उचथानि वेधोऽवोचाम कवये ता जुषस्व. उच्छोचस्व कृणुहि वस्यसो नो महो रायः पुरुवार प्र यन्धि.. (२०) हे विधाता एवं मेधावी अग्नि! अपने उद्देश्य से बोले गए इस मंत्रसमूह को स्वीकार करो एवं उद्दीप्त होकर हमें परमसंपत्तिशाली बनाओ. हे बहुतों द्वारा वरण करने योग्य अग्नि! हमें महान् धन दो. (२०) सूक्त-३ देवता—अग्नि आ वो राजानमध्वरस्य रुद्रं होतारं सत्ययजं रोदस्योः. अग्निं पुरा तनयित्नोरचित्ताद्धिरण्यरूपमवसे कृणुध्वम्.. (१) हे यजमानो! वज्र के समान ध्रुवमृत्यु से पहले ही यज्ञ के स्वामी, देवों को बुलाने वाले, शत्रुओं को रुलाने वाले, धरती-आकाश को अन्न देने वाले एवं सुनहरी प्रभा से युक्त अग्नि की अपनी रक्षा के निमित्त हवि से सेवा करो. (१) अयं योनिश्चकृमा यं वयं ते जायेव पत्य उशती सुवासाः. अर्वाचीनः परिवीतो नि षीदेमा उ ते स्वपाक प्रतीचीः.. (२) हे अग्नि! जिस प्रकार पति की अभिलाषा करती हुई एवं शोभन वस्त्रों वाली पत्नी अपने समीप पति को स्थान देती है, उसी प्रकार हम तुम्हारे लिए उत्तर वेदी रूप स्थान निश्चित करते हैं. हे उत्तम कर्मों वाले अग्नि! तुम देवों से घिरे हुए हमारे सामने बैठो. समस्त ebook converter DEMO Watermarks*